Perplexity AI ने गूगल क्रोम खरीदने के लिए 34.5 अरब डॉलर का प्रस्ताव दिया – भारतीय मूल के CEO अरविंद श्रीनिवास का बड़ा कदम!

Perplexity AI ने गूगल क्रोम खरीदने के लिए 34.5 अरब डॉलर का प्रस्ताव दिया – भारतीय मूल के CEO अरविंद श्रीनिवास का बड़ा कदम!

Perplexity AI, भारतीय मूल के अरविंद श्रीनिवास के नेतृत्व में, ने 34.5 अरब डॉलर में Google Chrome खरीदने का साहसिक प्रस्ताव दिया है। जाने इस ऐतिहासिक ऑफर के पीछे की वजह और इसका टेक इंडस्ट्री पर प्रभाव।

Perplexity AI – AI इंडस्ट्री का उभरता सितारा


2022 में अरविंद श्रीनिवास द्वारा स्थापित Perplexity AI ने तेज़ी से ग्लोबल AI मार्केट में अपनी पहचान बनाई है।
यह प्लेटफ़ॉर्म पारंपरिक सर्च इंजनों से अलग, सीधे और प्रमाणित स्रोतों के साथ उत्तर प्रदान करता है।

– प्रमुख निवेशक: Nvidia, जेफ बेज़ोस, SoftBank
– मुख्य उद्देश्य: AI के ज़रिये पारदर्शी और तेज़ सर्च अनुभव देना
– वैश्विक पहुंच: करोड़ों यूज़र्स तक रणनीतिक साझेदारियां

गूगल क्रोम के अधिग्रहण का प्रस्ताव क्यों खास है?


12 अगस्त 2025 को Perplexity AI ने Google को 34.5 अरब डॉलर का ऑफर देकर सबको चौंका दिया।
ये राशि कंपनी की मौजूदा वैल्यूएशन (18 अरब डॉलर) से लगभग दोगुनी है।

Google पर 2024 में अमेरिकी कोर्ट द्वारा एंटीट्रस्ट उल्लंघन का आरोप साबित हुआ था, जिसमें कहा गया कि कंपनी ने सर्च मार्केट में अनुचित दबदबा बनाया। Chrome का अलग होना एक समाधान माना गया।

आज Chrome के पास:
– 3 अरब से अधिक सक्रिय यूज़र
– 65% से ज्यादा ब्राउज़र मार्केट शेयर
ये वजहें इसे तकनीकी दुनिया का सबसे कीमती डिजिटल प्रोडक्ट बनाती हैं।

Perplexity AI की योजना और शर्तें


Project Solomon नाम से इस डील को तैयार किया गया है, जिसमें शामिल हैं:
1. Chrome के Chromium इंजन को ओपन-सोर्स रखना
2. Google को डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन बनाए रखना
3. 2 साल में 3 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश
4. असली Chrome इंजीनियर्स को टीम में बनाए रखना

Perplexity का कहना है कि यह कदम सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि पब्लिक इंटरेस्ट और प्रतिस्पर्धा संतुलन के लिए है।

रणनीतिक महत्व: AI ब्राउज़र की नई क्रांति


Perplexity अपने AI-आधारित “Comet” ब्राउज़र पर काम कर रही है।
अगर Chrome का अधिग्रहण सफल हो गया, तो यह:
– अरबों यूज़र्स तक सीधी पहुंच देगा
– गूगल के सर्च दबदबे को चुनौती देगा
– AI और इंटरनेट सर्च अनुभव को नया रूप देगा

अरविंद श्रीनिवास – सिलीकोन वैली में भारतीय मूल का नेतृत्व


– जन्म: चेन्नई, भारत।
– शिक्षा: IIT मद्रास, UC बर्कले (PhD)
– करियर: OpenAI, Google Brain, DeepMind
– दृष्टि: स्वतंत्र AI कंपनी बनाना, तकनीक को सभी के लिए सुलभ और पारदर्शी रखना
– उपलब्धि: Apple और Meta जैसे दिग्गजों के अधिग्रहण प्रस्ताव ठुकराए

निष्कर्ष: टेक इंडस्ट्री का पावर शिफ्ट?


Perplexity का 34.5 अरब डॉलर का प्रस्ताव सिर्फ एक बिज़नेस डील नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी जगत की दिशा बदलने वाला कदम हो सकता है।
इससे:
– ब्राउज़र और सर्च मार्केट में नई प्रतिस्पर्धा
– यूज़र डेटा और गोपनीयता पर नए मानक
– AI इंटीग्रेशन में तेजी
देखने वाली बात होगी कि क्या Google इस प्रस्ताव को मंजूर करता है या नहीं।

SEO कीवर्ड्स
– Perplexity AI
– अरविंद श्रीनिवास
– Google Chrome अधिग्रहण
– 34.5 अरब डॉलर डील
– AI ब्राउज़र
– Chromium ओपन सोर्स
– Comet ब्राउज़र
– Google Antitrust केस

OpenAI ने लॉन्च किया GPT-5: अब तक का सबसे उन्नत AI मॉडल, भारत बना तेजी से बढ़ता बाजार!

OpenAI ने लॉन्च किया GPT-5: अब तक का सबसे उन्नत AI मॉडल, भारत बना तेजी से बढ़ता बाजार!

OpenAI ने लॉन्च किया GPT-5, जो कोडिंग और एजेंटिक टास्क में अब तक का सबसे उन्नत AI मॉडल है। CEO सैम ऑल्टमैन ने भारत को AI अपनाने में तेजी से बढ़ता बाजार बताया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा कदम उठाते हुए OpenAI ने अपने क्रांतिकारी चैटबॉट ChatGPT को शक्ति देने वाले GPT-5 मॉडल को आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। कंपनी के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने इसे अब तक का “कोडिंग और एजेंटिक टास्क्स के लिए सबसे बेहतरीन मॉडल” बताया।

लॉन्च के दौरान ऑल्टमैन ने भारत में Artificial Intelligence (AI) के प्रति बढ़ते रुझान को भी रेखांकित किया और इसे “अविश्वसनीय रूप से तेज़ी से बढ़ता” बाजार करार दिया।

GPT-5 में क्या है नया?


GPT-4 की सफलता पर आधारित GPT-5 में गति, सटीकता और विशेषज्ञता के मामले में बड़ा सुधार किया गया है। इसे साधारण बातचीत से लेकर पेशेवर और जटिल कार्यों के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया है। इसके मुख्य फीचर्स में शामिल हैं—

बेहतरीन कोडिंग क्षमता: यह अब कई प्रोग्रामिंग भाषाओं में तेज़ी से और उच्च गुणवत्ता के साथ कोड लिखने, डिबग करने और ऑप्टिमाइज़ करने में सक्षम है।

एजेंटिक इंटेलिजेंस: अब GPT-5 स्वायत्त एजेंट की तरह काम कर सकता है, यानी यह कई चरणों में सोचने, योजना बनाने और बिना लगातार मानवीय हस्तक्षेप के कार्य पूरे करने में सक्षम है।

लंबा और गहन संदर्भ समझना: यह लंबे और जटिल प्रॉम्प्ट्स को भी बिना संदर्भ खोए समझ सकता है, जिससे रिसर्च, कानूनी विश्लेषण और क्रिएटिव राइटिंग में मदद मिलती है।

अधिक तथ्यात्मक सटीकता: GPT-5 में गलत या काल्पनिक जवाबों (AI hallucinations) की संभावना पहले से काफी कम हो गई है।


ऑल्टमैन ने कहा, “GPT-5 सिर्फ ज़्यादा स्मार्ट नहीं है, बल्कि और भी ज़्यादा उपयोगी है। यह जटिल वर्कफ़्लो को संभाल सकता है, निर्णय लेने में मदद कर सकता है और व्यक्तियों व संगठनों के लिए भरोसेमंद साथी की तरह काम कर सकता है।”

भारत: AI में उभरती ताकत


GPT-5 लॉन्च के दौरान भारत को लेकर भी खास चर्चा हुई। सैम ऑल्टमैन ने बताया कि भारत AI अपनाने के मामले में दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाजारों में से एक है, जिसकी वजह है—

1. मजबूत टेक इकोसिस्टम: भारत के पास बड़ी संख्या में कुशल सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स हैं, जिससे यह AI डेवलपमेंट का प्राकृतिक केंद्र बन रहा है।


2. तेज़ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: आईटी, वित्त, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सेक्टर्स में तेजी से AI अपनाया जा रहा है।


3. सरकारी पहल: राष्ट्रीय AI रणनीति और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप जैसे कदम AI को बढ़ावा दे रहे हैं।


4. Startup innovation: भारत में AI-फोकस्ड स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों के लिए सॉल्यूशंस बना रहे हैं।



ऑल्टमैन ने कहा, “भारत की टैलेंट, महत्वाकांक्षा और टेक्नोलॉजी अपनाने की क्षमता इसे AI के भविष्य का अहम हिस्सा बनाती है। हम उत्सुक हैं कि यहां के डेवलपर्स और कंपनियां GPT-5 का कैसे इस्तेमाल करेंगी।”

तकनीकी दुनिया पर GPT-5 का असर


GPT-5 की लॉन्चिंग से कई सेक्टर्स में बदलाव देखने को मिल सकते हैं—

1. सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट

बेहतर कोडिंग स्किल्स के साथ यह एक वर्चुअल पेयर प्रोग्रामर की तरह काम करेगा, जिससे विकास का समय घटेगा और कोड की क्वालिटी बढ़ेगी।

2. शिक्षा और ई-लर्निंग

यह पर्सनलाइज्ड लर्निंग असिस्टेंट के रूप में छात्रों को जटिल कॉन्सेप्ट्स समझाने और स्किल प्रैक्टिस कराने में मदद करेगा।

3. स्वास्थ्य क्षेत्र

डॉक्टर और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स इसे रिसर्च, क्लिनिकल डॉक्यूमेंटेशन और पेशेंट इंटरैक्शन में इस्तेमाल कर सकेंगे।

4. कस्टमर सर्विस

GPT-5 आधारित चैटबॉट्स अब और जटिल क्वेरीज़ को भी सही और तेज़ी से हल कर पाएंगे।

5. कंटेंट क्रिएशन

न्यूज़ आर्टिकल्स, ब्लॉग्स, मार्केटिंग कैंपेन और SEO कंटेंट को तेजी से तैयार किया जा सकेगा, जिससे समय और लागत दोनों बचेंगे।

एजेंटिक AI की ओर बड़ा कदम


GPT-5 की सबसे खास बात इसका एजेंटिक इंटेलिजेंस है। यह अब सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि खुद से कार्य की योजना बना सकता है, जानकारी जुटा सकता है और उसे लागू कर सकता है। इससे—

बिज़नेस वर्कफ़्लो ऑटोमेशन

रिसर्च और रिपोर्टिंग

वर्चुअल एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट जैसी सुविधाएं
संभव हो जाती हैं।

जिम्मेदार AI और सुरक्षा


OpenAI ने GPT-5 के साथ एथिकल और सेफ AI पर जोर दिया है। इसमें शामिल हैं—

मजबूत कंटेंट मॉडरेशन टूल्स

बायस कम करने की तकनीक

AI के निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता


ऑल्टमैन ने कहा, “हम चाहते हैं कि AI समाज के लिए फायदेमंद हो और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जाए।”

भारत के लिए अवसर


GPT-5 भारत को AI अपनाने में वैश्विक लीडर बनने का मौका देता है। युवा जनसंख्या, बढ़ती इंटरनेट पहुंच और मजबूत टेक इंडस्ट्री के साथ, भारत में दुनिया-स्तरीय AI समाधान बनाने की क्षमता है।

निष्कर्ष


OpenAI का GPT-5 सिर्फ एक नया AI मॉडल नहीं, बल्कि मानव और मशीन के सहयोग का अगला चरण है। इसकी उन्नत कोडिंग क्षमता, एजेंटिक योग्यता और बेहतर संदर्भ समझ इसे अब तक का सबसे सक्षम AI बनाती है।

भारत के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वह AI तकनीक का उपयोग कर आर्थिक विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह मजबूत करे। जैसा कि सैम ऑल्टमैन ने कहा—AI क्रांति अभी बस शुरुआत है, और भारत इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।