
राहुल गांधी ने बिहार के सासाराम से 1,300 किलोमीटर लंबी वोटर अधिकार यात्रा शुरू की। यह यात्रा ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर जनता को जागरूक करने और 2025 चुनाव से पहले INDIA गठबंधन को नई ऊर्जा देने का प्रयास है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर जनता से सीधा जुड़ने के लिए सड़क पर उतरने का फैसला किया है। रविवार को उन्होंने बिहार के सासाराम से 1,300 किलोमीटर लंबी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की। इस यात्रा का मकसद विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के अभियान को मजबूती देना है, जो सत्तारूढ़ दल पर“वोट चोरी”(मत चुराने) का आरोप लगाता रहा है।
सासाराम से शुरुआत: राजनीतिक प्रतीकवाद
बिहार की धरती ने हमेशा राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों को जन्म दिया है। ऐसे में राहुल गांधी का सासाराम से यात्रा की शुरुआत करना प्रतीकात्मक माना जा रहा है। वे जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि चुनाव में पारदर्शिता और मतदाता का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है।
राहुल गांधी पहले भी भारत जोड़ो यात्रा जैसे अभियानों के जरिए लोगों से संवाद कर चुके हैं। अब वे वोट की ताकत और उसकी सुरक्षा को अपना मुख्य मुद्दा बना रहे हैं।
लोकतंत्र और मतदाता अधिकार पर जोर
यात्रा की शुरुआत के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि मुफ्त और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की नींव हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार चुनाव प्रक्रिया को धनबल, दबाव और संस्थागत दखल के जरिए प्रभावित कर रही है।
यात्रा का नारा— “वोटर का अधिकार, देश का सम्मान”— यह दर्शाता है कि यह लड़ाई किसी एक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे चुनावी तंत्र को निष्पक्ष बनाने की है।
यात्रा का रूट और लक्ष्य
यह ‘वोटर अधिकार यात्रा’ 1,300 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें बिहार के कई जिलों और आसपास के राज्यों से होकर गुजरना शामिल है। यात्रा के दौरान राहुल गांधी किसानों, युवाओं, महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और नए मतदाताओं से मुलाकात करेंगे।
यात्रा में जनसभाएं, नुक्कड़ मीटिंग्स और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोगों को उनके मताधिकार के महत्व के बारे में जागरूक किया जा सके।
बिहार के 40 लोकसभा सीटों को देखते हुए यह अभियान खास मायने रखता है।
INDIA गठबंधन में एकता की कोशिश
INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस) के भीतर कई बार समन्वय की समस्या और नेतृत्व को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी की यह यात्रा विपक्षी दलों को एक साझा मंच देने का प्रयास मानी जा रही है।
राजद (RJD), वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय सहयोगी दलों के नेताओं के भी इस यात्रा में शामिल होने की संभावना है। इससे कांग्रेस और INDIA गठबंधन दोनों को एक मजबूत राजनीतिक संदेश मिलेगा।
जनता से जुड़े असली मुद्दे
इस यात्रा के दौरान कांग्रेस पार्टी केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता से जुड़े अहम मुद्दों को उठा रही है:
चुनावी पारदर्शिता – ईवीएम और मतदाता सूची पर सख्त निगरानी की मांग।
रोज़गार – युवाओं में बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बनाना।
किसान संकट – एमएसपी और कृषि सुधारों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा।
सामाजिक न्याय – दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर जोर।
इन मुद्दों को मताधिकार की सुरक्षा से जोड़कर राहुल गांधी जनता को सीधा संदेश देना चाहते हैं।
प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक असर
सत्तारूढ़ बीजेपी ने इस यात्रा को “राजनीतिक नाटक” करार देते हुए खारिज किया है। उनका कहना है कि भारत का चुनावी तंत्र दुनिया का सबसे पारदर्शी और मजबूत तंत्र है।
वहीं, कांग्रेस और विपक्षी दलों का मानना है कि यह यात्रा जनता में नई ऊर्जा पैदा करेगी, जैसा कि भारत जोड़ो यात्रा के समय देखने को मिला था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असली परीक्षा तब होगी जब इसके परिणाम बिहार के चुनावी नतीजों में दिखाई देंगे, जहां जातीय समीकरण और स्थानीय राजनीति अहम भूमिका निभाती है।
2025 और 2026 चुनावों की तैयारी
यह यात्रा ऐसे समय शुरू हुई है जब आने वाले समय में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और उसके बाद लोकसभा चुनाव 2026 होने वाले हैं। विपक्ष का मानना है कि यह यात्रा उनके लिए मजबूत चुनावी आधार तैयार कर सकती है।
यदि यह पहल सफल होती है, तो राहुल गांधी अन्य राज्यों में भी ऐसी यात्राओं के जरिए जनता से जुड़ने की रणनीति अपना सकते हैं।
वोटर अधिकार यात्रा: निष्कर्ष
राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मताधिकार की सुरक्षा के लिए एक जन आंदोलन का रूप ले सकती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह यात्रा जनता के बीच गहरी पैठ बना पाएगी और विपक्ष को मजबूत आधार दिला पाएगी, या फिर यह केवल प्रतीकात्मक कदम बनकर रह जाएगी।
फिलहाल इतना तय है कि राहुल गांधी ने एक बार फिर खुद को राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में स्थापित कर लिया है।
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