Vote chori विवाद: कांग्रेस ने खोला मोर्चा, राहुल गांधी को EC का अल्टीमेटम!

Vote chori विवाद: कांग्रेस ने खोला मोर्चा, राहुल गांधी को EC का अल्टीमेटम!

कांग्रेस पार्टी ने “Vote chori” अभियान शुरू कर मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग की, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को नोटिस का जवाब देने या माफी मांगने की चेतावनी दी।

कांग्रेस पार्टी ने आज आधिकारिक तौर पर अपना “Vote chori” अभियान लॉन्च किया, जिसमें उसने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से पूर्ण पारदर्शिता की मांग की।

“Vote chori” अभियान: लोकतंत्र की रक्षा का दावा


नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने में विफल रहा है। पार्टी का दावा है कि मतदाता सूचियों में फर्जी नाम, डुप्लीकेट एंट्री और जानबूझकर की गई हेराफेरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “Vote chori लोकतंत्र पर सीधा हमला है। हम मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट, पारदर्शी प्रक्रिया और सूची तैयार करने की पूरी पद्धति सार्वजनिक करने की मांग करते हैं।”

इस अभियान के तहत कांग्रेस राज्य स्तर पर रैलियां, घर-घर जनसंपर्क और सोशल मीडिया अभियान चलाएगी। #StopVoteChori और #ProtectYourVote जैसे हैशटैग के जरिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा कि वे अपनी मतदाता जानकारी जांचें और किसी भी गड़बड़ी की रिपोर्ट चुनाव आयोग को दें।

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया


कांग्रेस के आरोपों पर चुनाव आयोग ने मौजूदा व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि मतदाता सूची को सटीक रखने के लिए पहले से कई स्तरों पर जांच की जाती है। साथ ही, आयोग ने राहुल गांधी को चेतावनी देते हुए कहा:

> “राहुल गांधी को कर्नाटक के CEO द्वारा जारी पूर्व नोटिस का निर्धारित समय में उत्तर देना होगा या फिर अपने बयान के लिए राष्ट्र से माफी मांगनी होगी। अन्यथा इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अवहेलना माना जाएगा।”

विवाद की पृष्ठभूमि


यह टकराव उस वक्त शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक रैली के दौरान आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में हेराफेरी कर कुछ राजनीतिक दलों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। चुनाव आयोग ने उनसे सबूत पेश करने या बयान वापस लेने को कहा था।

सीधे जवाब देने के बजाय कांग्रेस ने अपने रुख को और तेज कर दिया और आज “वोट चोरी” अभियान का आगाज कर दिया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं


भाजपा ने इस अभियान को “चुनाव से पहले विवाद पैदा करने की हताश कोशिश” बताया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “कांग्रेस बार-बार जनता का विश्वास खो रही है। आत्ममंथन करने के बजाय वह स्वतंत्र संस्थाओं पर हमला कर रही है।”

वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसी कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग का समर्थन तो किया, लेकिन “Vote chori” नारे से दूरी बनाए रखी।

भारत में मतदाता सूची का महत्व


मतदाता सूची चुनावों की नींव होती है। इनमें किसी भी तरह की गलती या हेराफेरी से नागरिकों का वोट अधिकार छिन सकता है या फर्जी मतदान का रास्ता खुल सकता है। पहले भी चुनाव आयोग को मृत व्यक्तियों के नाम हटाने, डुप्लीकेट एंट्री और अपडेट में देरी जैसी शिकायतों का सामना करना पड़ा है।

हालांकि, आयोग ने आधार-मतदाता पहचान पत्र लिंकिंग, ऑनलाइन सुधार और विशेष अभियान जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं।

कांग्रेस की आगे की रणनीति


पार्टी सूत्रों के अनुसार, “Vote chori” अभियान तीन चरणों में चलेगा—

1. जागरूकता: नागरिकों को अपनी मतदाता जानकारी जांचने और शिकायत दर्ज कराने के तरीके बताना।


2. कार्रवाई: गड़बड़ियों के सबूत इकट्ठा कर चुनाव आयोग को सौंपना।


3. वकालत: संसद और अदालत से मतदाता सूची के कड़े ऑडिट की मांग करना।



राहुल गांधी जल्द ही महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड जैसे चुनावी राज्यों में इस अभियान के तहत रैलियां करेंगे।

राहुल गांधी के लिए चुनौती


चुनाव आयोग की चेतावनी ने राहुल गांधी को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। अगर वे सबूत पेश करते हैं तो सियासी माहौल गरमा सकता है, और अगर माफी मांगते हैं तो यह उनके लिए पीछे हटने जैसा होगा।

निष्कर्ष


कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच यह विवाद केवल एक नेता या अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र की बुनियाद से जुड़ा मुद्दा है। मतदाता सूची की पवित्रता और चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता—दोनों पर जनता का भरोसा कायम रखना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

MK Muthu का निधन: करुणानिधि के सबसे बड़े बेटे का 77 वर्ष की उम्र में चेन्नई में देहांत!

MK Muthu का निधन: करुणानिधि के सबसे बड़े बेटे का 77 वर्ष की उम्र में चेन्नई में देहांत!


चेन्नई, 19 जुलाई 2025 — तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि के सबसे बड़े पुत्र MK Muthu का शनिवार सुबह निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे और चेन्नई के ईंजामबक्कम स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली।

लंबी बीमारी के बाद शांतिपूर्ण अंत


पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, MK Muthu पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। शनिवार सुबह उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और फिल्मी जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

फिल्मों और राजनीति से जुड़ी दोहरी पहचान


MK Muthu का जन्म 1948 में हुआ था। वे करुणानिधि और उनकी पहली पत्नी पद्मावती के पुत्र थे। शुरुआत में उन्हें राजनीति में लाने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में उन्होंने फिल्मी करियर का रुख किया और 1970 के दशक में तमिल सिनेमा में कदम रखा।

उन्होंने पिल्लैयो पिल्लै, समयलकारन, इंगेयुम मनिधर्गल जैसी फिल्मों में अभिनय किया। उन्हें उस दौर में अभिनेता और नेता एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) के मुकाबले खड़ा करने की कोशिश की गई थी। हालांकि, उनका फिल्मी करियर बहुत लंबा नहीं चला, लेकिन उनका नाम हमेशा तमिल सिनेमा और राजनीति के संगम का प्रतीक माना गया।

राजनीति में भी उन्होंने कभी-कभार सक्रियता दिखाई, लेकिन अपने पिता से मतभेदों के कारण वह लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे। हालांकि, बाद के वर्षों में करुणानिधि और मुथु के संबंधों में सुधार हुआ था।

नेताओं और कलाकारों ने जताया शोक


मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, जो MK Muthu के सौतेले भाई हैं, ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “एमके मुथु का निधन मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से एक गहरी क्षति है। मतभेदों के बावजूद वह परिवार का हिस्सा थे और उनकी आत्मा को शांति मिले, यही कामना है।”

डीएमके, एआईएडीएमके और अन्य दलों के नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “एमके मुथु ने फिल्मों और राजनीति दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका सफर आसान नहीं था, लेकिन वे याद किए जाएंगे।”

अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार


परिवार ने बताया कि MK Muthu के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए ईंजामबक्कम स्थित उनके घर पर रखा जाएगा। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार आज ही किया जाएगा। आम जनता और राजनीतिक हस्तियों के लिए अंतिम श्रद्धांजलि देने की व्यवस्था की गई है।

एक विरासत जो हमेशा याद रहेगी


MK Muthu भले ही राजनीति या सिनेमा में बहुत अधिक सक्रिय न रहे हों, लेकिन करुणानिधि के सबसे बड़े पुत्र होने के नाते वे तमिलनाडु की सामाजिक और राजनीतिक विरासत का अहम हिस्सा थे।