पीएम मोदी का 75वां जन्मदिन: ऑपरेशन सिंदूर, नया भारत और पाकिस्तान को सख्त संदेश!

पीएम मोदी का 75वां जन्मदिन: ऑपरेशन सिंदूर, नया भारत और पाकिस्तान को सख्त संदेश!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना 75वां जन्मदिन 17 सितंबर 2025 को मध्यप्रदेश के धार जिले में मनाया। जन्मदिन के अवसर पर जहां कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बधाइयों और उत्सव का माहौल बनाया, वहीं पीएम मोदी के भाषण ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बटोरीं

अपने संबोधन में मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता की सराहना की, साफ कहा कि “नया भारत अब परमाणु धमकियों से डरने वाला नहीं है”, और यह भी घोषित किया कि भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान को “पलक झपकते ही घुटनों पर ला दिया।”

यह भाषण केवल जन्मदिन का संदेश नहीं था, बल्कि भारत की नई सुरक्षा नीति और आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को दर्शाने वाला बयान भी था।

ऑपरेशन सिंदूर क्या है?


7 मई 2025 को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ढाँचों पर लक्षित सैन्य कार्रवाई की। इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। यह कदम 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद उठाया गया, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी।

इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के कई ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। बताया जाता है कि बहावलपुर, कोटली और मुरिदके जैसे क्षेत्रों में आतंकी लॉन्च पैड्स पर सटीक प्रहार किए गए।

सरकार का दावा है कि यह पूरी तरह सर्जिकल और सटीक कार्रवाई थी, जिसमें आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया और आम नागरिकों को नुकसान से बचाया गया।

पीएम मोदी के सबसे महत्वपूर्ण बयान


धार की जनसभा में पीएम मोदी के शब्दों ने भीड़ से जबरदस्त तालियाँ बटोरीं। उनके कुछ प्रमुख बयान इस प्रकार रहे:

1. “नया भारत परमाणु धमकियों से नहीं डरता”

मोदी ने स्पष्ट कहा कि “यह नया भारत है, जो अब किसी के परमाणु ब्लैकमेल से भयभीत नहीं होता।” यह पाकिस्तान के उस पुराने रुख पर सीधा वार था, जिसमें वह भारत को सैन्य कार्रवाई से रोकने के लिए बार-बार परमाणु युद्ध का हवाला देता रहा है।

2. पाकिस्तान घुटनों पर “पलक झपकते ही”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने इतनी तेजी और दृढ़ता से ऑपरेशन अंजाम दिया कि पाकिस्तान संभल ही नहीं पाया और उसके आतंकी ढाँचे “कुछ ही पलों में ध्वस्त हो गए।”

3. “सिंदूर” की रक्षा का प्रतीक

मोदी ने कहा कि आतंकी भारत की बहनों-बेटियों का “सिंदूर मिटाने” की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारतीय नारी की गरिमा और राष्ट्र की प्रतिष्ठा की रक्षा का प्रतीक भी थी।

4. आतंकी संगठनों की स्वीकारोक्ति

मोदी ने एक जैश-ए-मोहम्मद कमांडर के वीडियो का जिक्र किया, जिसमें उसने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर में उन्हें भारी नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकी सरगना मसूद अजहर के परिवार को भी इसकी चोट झेलनी पड़ी।

“नया भारत” की परिकल्पना


मोदी के भाषण ने केवल सुरक्षा संदेश ही नहीं दिया, बल्कि उनके “नए भारत” के विज़न को भी मजबूत किया।

परमाणु धमकियों से इंकार: भारत अब डरने वाला नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी राष्ट्र है।

सक्रिय सैन्य रणनीति: भारत केवल हमलों का जवाब ही नहीं देता, बल्कि आतंकी ढाँचों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है।

आत्मनिर्भर भारत: पीएम ने नागरिकों से अपील की कि त्योहारों में स्वदेशी उत्पाद खरीदें और घरेलू उद्योगों को मजबूती दें।

नारी गरिमा की रक्षा: “सिंदूर” का प्रतीक दिखाता है कि सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की रक्षा का भी हिस्सा है।

विकसित भारत का लक्ष्य: मोदी ने सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और विकास को एक-दूसरे से जोड़ा।

राजनीतिक और रणनीतिक महत्व


मोदी के जन्मदिन पर दिया गया यह भाषण कई स्तरों पर असर डालता है:

घरेलू राजनीति: मजबूत नेतृत्व की छवि और राष्ट्र की गरिमा की रक्षा का संदेश उनके समर्थकों के बीच लोकप्रियता बढ़ाता है।

सैनिक मनोबल: ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर सेना की सराहना से जवानों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा।

कूटनीतिक संदेश: पाकिस्तान और वैश्विक मंच पर यह संकेत गया कि भारत अब किसी भी तरह के दबाव में झुकने वाला नहीं है।

विपक्षी सवाल: कुछ आलोचकों ने सबूतों की स्वतंत्र पुष्टि और संभावित परमाणु तनाव बढ़ने की आशंका को लेकर सवाल उठाए।

आगे की चुनौतियाँ


मोदी के बयान जितने दमदार थे, उतने ही कुछ अहम प्रश्न भी खड़े करते हैं:

सफलता का प्रमाण: क्या आतंकी ढाँचों का विनाश पूरी तरह हुआ?

तनाव का खतरा: परमाणु धमकियों को नकारना साहसी कदम है, पर क्या यह पाकिस्तान को और आक्रामक बना सकता है?

दीर्घकालिक असर: क्या ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद को स्थायी रूप से कमजोर करेगा या आतंकी संगठन फिर से खड़े होंगे?

राजनीतिक संदर्भ: क्या यह भाषण सुरक्षा संदेश से ज्यादा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था?

निष्कर्ष


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वां जन्मदिन भाषण केवल एक उत्सव का हिस्सा नहीं था, बल्कि भारत की सुरक्षा नीति और भविष्य की दिशा पर बड़ा बयान था। ऑपरेशन सिंदूर को याद कर उन्होंने सैनिकों की वीरता की प्रशंसा की, पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया और यह स्पष्ट किया कि “नया भारत अब किसी परमाणु धमकी से नहीं डरता।”

मोदी ने सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और महिला गरिमा जैसे मुद्दों को जोड़कर अपने नेतृत्व की छवि और मजबूत बनाई। चाहे इसे कूटनीति और सुरक्षा का साहसी कदम माना जाए या राजनीति का हिस्सा, इतना तय है कि यह भाषण भारत की राष्ट्रीय चर्चा में लंबे समय तक गूंजता रहेगा।

बेंगलुरु Yellow line metro उद्घाटन: पीएम मोदी ने दी ट्रैफिक जाम से राहत की सौगात!

बेंगलुरु Yellow line metro उद्घाटन: पीएम मोदी ने दी ट्रैफिक जाम से राहत की सौगात!


Bengaluru Yellow Line Metro शुरू! ट्रैफिक से छुटकारा पाएं, देखें रूट, स्टेशन, किराया और सफर को तेज़ व आरामदायक बनाने वाले फीचर्स।

बेंगलुरु मेट्रो ट्रैफिक समाधान के सफर में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। रविवार, 10 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुप्रतीक्षित नम्मा मेट्रो के Yellow line metro route का उद्घाटन किया। यह रूट शहर के दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों को जोड़ते हुए लाखों यात्रियों को रोज़ के जाम और प्रदूषण की परेशानी से राहत दिलाएगा।

Yellow line metro route की मुख्य जानकारी


– **रूट:** आरवी रोड (रागिगुड्डा) से बोम्मासंद्रा
– **कुल लंबाई:** 19.15 किलोमीटर
– **स्टेशन:** 16 एलिवेटेड (ऊंचे) स्टेशन
– **परियोजना लागत:** ₹7,160 करोड़ (लगभग)
– **दैनिक यात्री क्षमता:** करीब 8 लाख
– **महत्वपूर्ण स्थान:** बीटीएम लेआउट, एचएसआर लेआउट, सेंट्रल सिल्क बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक सिटी, बोम्मासंद्रा, जयदेव अस्पताल

बेंगलुरु मेट्रो विस्तार योजना में Yellow line metro का महत्व



1️⃣ **भीषण ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत**

होसुर रोड, सिल्क बोर्ड जंक्शन और इलेक्ट्रॉनिक सिटी जैसी जगहें बेंगलुरु के सबसे ट्रैफिक-भरे रूट माने जाते हैं। अब namma metro yellow line metro route इन इलाकों को तेज़, भरोसेमंद और प्रदूषण-मुक्त कनेक्टिविटी देगा।
– पीक ऑवर में पहले जहां आरवी रोड से बोम्मासंद्रा का सफर 2 घंटे का होता था, अब यह मात्र 35-45 मिनट में पूरा होगा।

2️⃣ **रिहायशी और औद्योगिक हब का सीधा कनेक्शन**

यह लाइन बीटीएम लेआउट और एचएसआर लेआउट जैसे रिहायशी क्षेत्रों को सीधे इलेक्ट्रॉनिक सिटी और बोम्मासंद्रा इंडस्ट्रियल एरिया जैसे आईटी और औद्योगिक केंद्रों से जोड़ेगी।
– इंफोसिस, टीसीएस (TCS), बायोकॉन और अन्य कंपनियों के कैंपस इस रूट से सीधे जुड़ जाएंगे।
– जयदेव अस्पताल और प्रमुख कॉलेजों तक पहुंचना और भी आसान होगा।

3️⃣ **मेट्रो नेटवर्क में बड़ा विस्तार**

Yellow line metro के जुड़ने से नम्मा मेट्रो नेटवर्क 96 किलोमीटर से अधिक लंबा हो गया है, जो दिल्ली मेट्रो के बाद देश में दूसरा सबसे लंबा नेटवर्क है।
– इंटरचेंज: आरवी रोड (ग्रीन लाइन), जयदेव अस्पताल (पिंक लाइन), और सेंट्रल सिल्क बोर्ड (ब्लू लाइन)
– सेवा आवृत्ति: शुरुआत में हर 25 मिनट, अगस्त अंत तक हर 20 मिनट
– किराया: ₹10 से ₹90 तक

Yellow line metro के खास फीचर्स


– सभी स्टेशन एलिवेटेड और व्हीलचेयर फ्रेंडली
– क्यूआर कोड टिकटिंग और ड्राइवरलेस ट्रेन सुविधा
– डिजिटल रूट मैप और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं
– पर्यावरणीय लाभ: लाखों यात्रियों को निजी वाहन से मेट्रो की ओर आकर्षित कर प्रदूषण कम करना

आगे की योजना – नम्मा मेट्रो फेज 3


उद्घाटन के साथ ही पीएम मोदी ने नम्मा मेट्रो फेज-3 का भी शिलान्यास किया। ₹15,610 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना से 44 किलोमीटर नए ट्रैक और 31 स्टेशन जुड़ेंगे। इससे बेंगलुरु मेट्रो नेटवर्क मैप और भी विस्तृत हो जाएगा।

शहर की प्रतिक्रिया


स्थानीय निवासी और यात्री इस मेट्रो लाइन को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
> “अब ऑफिस आने-जाने में घंटों का सफर आधे से भी कम समय में होगा,” — इलेक्ट्रॉनिक सिटी की एक आईटी प्रोफेशनल।

परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट बेंगलुरु मेट्रो ट्रैफिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और आने वाले समय में यह लाखों लोगों की प्राथमिक यात्रा सुविधा बन जाएगी।

निष्कर्ष


**बेंगलुरु येलो लाइन मेट्रो** सिर्फ एक यातायात परियोजना नहीं है, बल्कि शहर की स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में मजबूत कदम है। यह न केवल ट्रैफिक जाम से छुटकारा दिलाएगी बल्कि सफर को तेज़, सस्ता और आरामदायक बनाएगी।

अब चाहे आप छात्र हों, आईटी प्रोफेशनल या रोज़ाना के यात्री—यह मेट्रो लाइन आपके सफर को नई रफ़्तार देने के लिए तैयार है।

Shibu Soren का निधन: झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ नहीं रहे, पूरे राज्य में शोक की लहर!

Shibu Soren का निधन: झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ नहीं रहे, पूरे राज्य में शोक की लहर!

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संरक्षक Shibu Soren का 81 वर्ष की आयु में निधन। पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने सर गंगाराम अस्पताल जाकर दी श्रद्धांजलि। पढ़ें पूरी रिपोर्ट उनके जीवन, संघर्ष और योगदान पर।


झारखंड के वरिष्ठ राजनेता, पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संरक्षक Shibu Soren का सोमवार की सुबह निधन हो गया। 81 वर्ष की उम्र में उन्होंने दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। पिछले कई हफ्तों से वह किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती थे।
उनके निधन की खबर से झारखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

आदिवासी पहचान के सबसे मजबूत स्तंभ



Shibu Soren को ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि से सम्मानित किया जाता था। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में आदिवासी समुदाय की आवाज़ को न सिर्फ बुलंद किया, बल्कि उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार संघर्ष किया।
वह झारखंड को अलग राज्य बनाने के आंदोलन के अगुवा थे, और उनके प्रयासों से यह सपना हकीकत बना।

Shibu Soren का संघर्ष और राजनीतिक सफर



वर्ष 1972 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नींव रखी।

उन्होंने संसद में कई बार झारखंड की जनता का प्रतिनिधित्व किया।

तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे।

केंद्र सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी कार्य किया।

उनका राजनीतिक जीवन आदिवासियों की ज़मीन, जंगल और अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित था।

देश भर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला



Shibu Soren के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू दोनों ने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,

> “Shibu Soren जी का जीवन सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा में समर्पित था। उनका योगदान देश कभी नहीं भुला पाएगा।”



राष्ट्रपति मुर्मू ने शोक व्यक्त करते हुए कहा,

> “Shibu Soren जी के निधन से आदिवासी समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची है। वह एक प्रेरणा स्रोत थे।”

हेमंत सोरेन के लिए व्यक्तिगत क्षति



झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री और Shibu Soren के पुत्र हेमंत सोरेन ने पिता के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा,

> “मेरे लिए यह सिर्फ पारिवारिक नहीं, बल्कि वैचारिक नुकसान है। उन्होंने जो आदर्श दिए, वह हमेशा मेरे मार्गदर्शक रहेंगे।”



राज्य सरकार ने राजकीय शोक की घोषणा की है और अंतिम संस्कार रांची में पूरे सरकारी सम्मान के साथ संपन्न होगा।

आदिवासी समाज में शोक का माहौल



Shibu Soren के निधन से आदिवासी समाज में गहरा शोक व्याप्त है। झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में लोग उन्हें जननेता और मसीहा के रूप में याद कर रहे हैं।
उनकी अंतिम यात्रा में लाखों समर्थकों के जुटने की संभावना है।

एक जीवन जो आदर्श बना


Shibu Soren का जीवन आदिवासियों की पीड़ा, संघर्ष और सम्मान का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा जल, जंगल, ज़मीन और अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई।
उनकी सोच और संघर्षों ने आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने का काम किया है।

Shibu Soren: एक दृष्टिपात



विवरण — जानकारी

जन्म– 11 जनवरी 1944, नेमरा गांव, झारखंड
राजनीतिक दल– झारखंड मुक्ति मोर्चा
पद– तीन बार मुख्यमंत्री, कई बार सांसद
निधन– 4 अगस्त 2025, दिल्ली
कारण– किडनी की समस्या
आयु– 81 वर्ष
उपाधि– दिशोम गुरु

निष्कर्ष: विरासत अमर रहेगी



Shibu Soren का जाना सिर्फ एक नेता का जाना नहीं, बल्कि एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक आवाज़ का मौन हो जाना है। उन्होंने झारखंड और आदिवासी समाज को जो पहचान दिलाई, वह हमेशा स्मरणीय रहेगी।
उनकी विरासत हेमंत सोरेन और अगली पीढ़ी के नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।



भारत के उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा, तुरंत प्रभाव से लागू!

भारत के उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा, तुरंत प्रभाव से लागू!


देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारत के उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 74 वर्षीय धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंपा, जो तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है।

स्वास्थ्य को दी प्राथमिकता


उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने अपने पत्र में लिखा, “चिकित्सकीय सलाह पर और गहन विचार-विमर्श के बाद, मैंने उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया है। इस समय मेरी प्राथमिकता मेरा स्वास्थ्य है।”

इस अचानक लिए गए फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि धनखड़ हाल के दिनों तक सक्रिय रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे।

राजनीतिक प्रतिक्रिया


देशभर से नेताओं ने धनखड़ के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके कार्यकाल की सराहना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankharने पूरी निष्ठा और गरिमा के साथ देश की सेवा की। मैं उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करता हूं।”

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने शुभकामनाएं और सम्मान प्रकट किए हैं।

कार्यकाल और योगदान


Jagdeep Dhankhar ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उनकी सक्रिय भूमिका और सरकार के साथ टकराव चर्चा का विषय बने थे।

एक अनुभवी वकील और नेता के रूप में उनकी पहचान रही है। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने राज्यसभा के सभापति के रूप में निष्पक्ष और सख्त संचालन के लिए विशेष रूप से सराहना प्राप्त की।

आगे क्या?


Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे के बाद अब यह पद रिक्त हो गया है। जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की तिथि घोषित की जा सकती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है।

नई नियुक्ति तक, संवैधानिक प्रावधानों के तहत इस पद से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन अंतरिम व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

निष्कर्ष


उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar का अचानक इस्तीफा न केवल राजनीतिक रूप से अहम है, बल्कि यह इस बात की भी याद दिलाता है कि स्वास्थ्य किसी भी पद से ऊपर होता है। उनके अब तक के कार्यकाल को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, विधायी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका और संतुलित नेतृत्व के लिए याद किया जाएगा।



घाना की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: भारत-अफ्रीका संबंधों को नया आयाम!

घाना की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: भारत-अफ्रीका संबंधों को नया आयाम!


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 जुलाई 2025 को घाना की ऐतिहासिक दो दिवसीय यात्रा की शुरुआत की, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा तीन दशकों में घाना की पहली राजकीय यात्रा है। यह दौरा मोदी के पांच देशों के वैश्विक दौरे का पहला चरण है, जिसमें वह अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने के प्रयास में जुटे हैं।




भव्य स्वागत और सांस्कृतिक मेल

अकरा के कोटेका अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पीएम मोदी का पारंपरिक घाना शैली में स्वागत किया गया। उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई, साथ ही संगीत और नृत्य के रंगारंग कार्यक्रमों से उनका अभिनंदन किया गया। भारतीय प्रवासी समुदाय और स्थानीय बच्चों ने “हरे रामा हरे कृष्णा”, “वंदे मातरम्” और “भारत माता की जय” जैसे नारे लगाकर माहौल को भावनात्मक बना दिया।

घाना के राष्ट्रपति जॉन द्रामानी महामा ने स्वयं पीएम मोदी की अगवानी की, जो दोनों देशों के घनिष्ठ संबंधों का संकेत है।




द्विपक्षीय वार्ता और सहयोग के नए अध्याय

अकरा स्थित जुबिली हाउस में पीएम मोदी और राष्ट्रपति महामा के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई। दोनों नेताओं ने भारत-घाना संबंधों को “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के स्तर पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।

मुख्य बिंदु:

आर्थिक सहयोग: भारत और घाना के बीच वर्तमान में लगभग 3 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जिसे अगले पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया है।

डिजिटल पेमेंट: भारत अपने UPI डिजिटल भुगतान सिस्टम की तकनीक घाना के साथ साझा करेगा।

विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी: कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, रक्षा, खनिज संसाधन और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

एमओयू पर हस्ताक्षर: दोनों देशों ने संस्कृति, मानकीकरण और व्यापार सहयोग सहित चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए।





सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित

पीएम मोदी को घाना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार “ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना” से नवाजा गया। उन्होंने यह सम्मान भारत की युवा पीढ़ी और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित किया।




संसद को संबोधन और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात

प्रधानमंत्री ने घाना की संसद को संबोधित करते हुए लोकतंत्र और वैश्विक साझेदारी की भावना को मजबूत करने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने घाना में बसे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की, जिनमें कई परिवार दशकों से वहां रह रहे हैं।




वैश्विक दक्षिण की भूमिका में भारत

इस यात्रा ने भारत की “वैश्विक दक्षिण” में नेतृत्वकारी भूमिका को और मजबूत किया है। भारत अब BRICS, अफ्रीकी संघ और ECOWAS जैसे संगठनों के माध्यम से घाना जैसे देशों के साथ साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।




पीएम मोदी की टिप्पणी

प्रधानमंत्री ने कहा, “घाना वैश्विक दक्षिण में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। यह समय युद्ध का नहीं है, बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए समस्याएं सुलझाने का है।”




निष्कर्ष

पीएम मोदी की घाना यात्रा भारत और अफ्रीका के बीच साझेदारी को एक नए युग में ले गई है। आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की नई राहें खुली हैं। यह दौरा इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्व निभा रहा है, जो समानता, साझेदारी और विकास पर आधारित है।