
पूर्व राज्यपाल Satyapal Malik का 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के RML अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। पढ़ें पूरी खबर।
भारत के पूर्व राज्यपाल और अनुभवी राजनेता Satyapal Malik का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पिछले कुछ महीनों से इलाजरत थे। आज सुबह उन्होंने वहीं अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है।
एक साधारण शुरुआत से राष्ट्रीय पहचान तक
Satyapal Malik का जन्म 24 जुलाई 1947 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में हुआ था। उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि लेना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान बनाई। अपने जीवन में उन्होंने कई राजनीतिक दलों से जुड़ाव रखा, लेकिन भाजपा में रहते हुए उन्होंने अपनी मजबूत स्थिति स्थापित की।
कई राज्यों के राज्यपाल रहे
Satyapal Malik का प्रशासनिक अनुभव भी काफी व्यापक रहा। उन्होंने कई महत्वपूर्ण राज्यों में राज्यपाल का पद संभाला, जिनमें प्रमुख हैं:
जम्मू-कश्मीर (2018-2019) – अनुच्छेद 370 हटाए जाने से ठीक पहले का संवेदनशील समय।
गोवा (2019-2020) – भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रुख।
मेघालय (2020-2022) – किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्र की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाए।
सत्ता में रहते हुए भी सत्ताविरोधी आवाज
राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए भी Satyapal Malik ने कई बार सरकार की नीतियों की आलोचना की, विशेषकर कृषि कानूनों और किसान आंदोलन के दौरान। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार को किसानों की समस्याओं को संवेदनशीलता से हल करना चाहिए, वरना परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
उनकी स्पष्टवादिता और बेबाकी के कारण वे कई बार चर्चा में रहे। भाजपा से जुड़ाव होने के बावजूद, उन्होंने कभी भी अपनी राय व्यक्त करने से परहेज नहीं किया।
बीमारी और अंतिम यात्रा
मई 2025 में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें आरएमएल अस्पताल, दिल्ली में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी सेहत में सुधार नहीं हो पाया। अंततः, 5 अगस्त को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
राजनेताओं और आमजन की श्रद्धांजलि
उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विपक्षी दलों के नेता, मुख्यमंत्रियों और किसान संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने उन्हें “सत्य और सिद्धांतों के लिए समर्पित नेता” बताया, वहीं विपक्षी नेताओं ने उनकी निष्पक्ष सोच की सराहना की।
कई किसान संगठनों ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि वो किसानों की आवाज़ थे, जो हमेशा उनके साथ खड़े रहे।
अंतिम संस्कार और पार्थिव दर्शन
उनका पार्थिव शरीर 6 अगस्त को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के पैतृक गांव हिसावदा में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। वहां उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
Satyapal Malik: एक प्रेरणादायक विरासत
Satyapal Malik एक ऐसे राजनेता थे जो न केवल पद की गरिमा को समझते थे बल्कि जनहित को सर्वोपरि रखते थे। उन्होंने कई बार यह साबित किया कि सच्ची राजनीति का मतलब सत्ता में रहकर भी सत्य बोलना होता है।
उनकी सबसे बड़ी खासियत थी – बेबाकी और ईमानदारी, जो आज की राजनीति में विरल होती जा रही है।