
देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारत के उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 74 वर्षीय धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंपा, जो तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है।
स्वास्थ्य को दी प्राथमिकता
उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने अपने पत्र में लिखा, “चिकित्सकीय सलाह पर और गहन विचार-विमर्श के बाद, मैंने उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया है। इस समय मेरी प्राथमिकता मेरा स्वास्थ्य है।”
इस अचानक लिए गए फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि धनखड़ हाल के दिनों तक सक्रिय रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
देशभर से नेताओं ने धनखड़ के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके कार्यकाल की सराहना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankharने पूरी निष्ठा और गरिमा के साथ देश की सेवा की। मैं उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करता हूं।”
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने शुभकामनाएं और सम्मान प्रकट किए हैं।
कार्यकाल और योगदान
Jagdeep Dhankhar ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उनकी सक्रिय भूमिका और सरकार के साथ टकराव चर्चा का विषय बने थे।
एक अनुभवी वकील और नेता के रूप में उनकी पहचान रही है। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने राज्यसभा के सभापति के रूप में निष्पक्ष और सख्त संचालन के लिए विशेष रूप से सराहना प्राप्त की।
आगे क्या?
Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे के बाद अब यह पद रिक्त हो गया है। जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की तिथि घोषित की जा सकती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
नई नियुक्ति तक, संवैधानिक प्रावधानों के तहत इस पद से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन अंतरिम व्यवस्था के तहत किया जाएगा।
निष्कर्ष
उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar का अचानक इस्तीफा न केवल राजनीतिक रूप से अहम है, बल्कि यह इस बात की भी याद दिलाता है कि स्वास्थ्य किसी भी पद से ऊपर होता है। उनके अब तक के कार्यकाल को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, विधायी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका और संतुलित नेतृत्व के लिए याद किया जाएगा।
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