
भारत की संसद ने 20 अगस्त 2025 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए “ऑनलाइन गेमिंग बिल (प्रमोशन और रेगुलेशन) 2025” (Promotion and Regulation of Online Gaming Bill, 2025) को लोकसभा में पास कर दिया। यह कानून देश में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को नियंत्रित करने और उससे जुड़े खतरों को रोकने के लिए लाया गया है।
ऑनलाइन गेमिंग बिल का मुख्य उद्देश्य
इस विधेयक का सबसे अहम प्रावधान है – सभी प्रकार के पैसों पर आधारित ऑनलाइन गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध। इसमें फैंटेसी स्पोर्ट्स, पोकर, रम्मी, ऑनलाइन लॉटरी और बेटिंग जैसे खेल शामिल हैं, चाहे वे कौशल पर आधारित हों या किस्मत पर।
ऑनलाइन गेमिंग बिल तीन बड़े पहलुओं पर रोक लगाता है:
पैसों से जुड़े ऑनलाइन गेम्स की पेशकश या संचालन
ऐसे गेम्स का प्रचार-प्रसार और विज्ञापन
इनसे जुड़ी वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया
इसके तहत बैंकों और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म्स को भी ऐसे गेम्स के लिए कोई सुविधा देने से मना कर दिया गया है।
दंड और सख्ती
सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग बिल में सख्त प्रावधान रखे हैं ताकि इसका पालन सुनिश्चित हो सके:
ऑपरेटर और कंपनियां: अगर कोई कंपनी पैसों वाले गेम्स का संचालन करती है, तो उस पर 3 साल की कैद और/या 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
विज्ञापनदाता: अगर कोई संस्था ऐसे गेम्स का प्रचार करती है, तो 2 साल जेल और/या 50 लाख रुपये जुर्माना होगा।
बैंक और पेमेंट गेटवे: अगर ये संस्थान इस तरह के लेन-देन में शामिल पाए जाते हैं तो उन पर भी बराबर का अपराध माना जाएगा।
बार-बार अपराध करने वालों पर 3–5 साल की कैद और 2 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, इन अपराधों को गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है। यानी जांच एजेंसियों को बिना वारंट गिरफ्तारी और तलाशी का अधिकार होगा।
ई-स्पोर्ट्स और सुरक्षित गेमिंग को बढ़ावा
यह कानून केवल प्रतिबंध तक सीमित नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि:
ई-स्पोर्ट्स (e-sports) को एक मान्यता प्राप्त खेल की श्रेणी दी जाएगी।
युवा खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र, अनुसंधान और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जाएगा।
शैक्षिक और सामाजिक गेम्स, जो कौशल और डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहित करते हैं, उनकी अनुमति होगी।
ऐसे गेम्स जिनमें किसी प्रकार का पैसों का दांव न हो, उन्हें आगे बढ़ाया जाएगा।
राष्ट्रीय गेमिंग प्राधिकरण
इस विधेयक के तहत एक राष्ट्रीय गेमिंग प्राधिकरण (National Gaming Authority) की स्थापना का प्रस्ताव है। यह संस्था निम्न जिम्मेदारियां निभाएगी:
गेम्स और प्लेटफॉर्म्स का पंजीकरण और वर्गीकरण
यह तय करना कि कौन-सा गेम “मनी गेम” है
शिकायतों का निपटारा करना
समय-समय पर दिशा-निर्देश और नीतियां जारी करना।
सरकार का तर्क और उद्देश्य
सरकार ने इस ऑनलाइन गेमिंग बिल के पीछे कई बड़े कारण बताए हैं:
युवाओं में बढ़ती लत, कर्ज और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को रोकना।
अवैध बेटिंग और जुए से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाना।
देशभर में एक एकीकृत कानून लाना, क्योंकि अभी अलग-अलग राज्यों के अपने-अपने नियम हैं।
जिम्मेदार और सुरक्षित गेमिंग को बढ़ावा देकर भारत को एक सुरक्षित डिजिटल इकोनॉमी की ओर ले जाना।
हितधारकों की प्रतिक्रिया
इस विधेयक को लेकर अलग-अलग वर्गों की राय बंटी हुई है।
समर्थन में आवाजें
समर्थक मानते हैं कि यह कानून युवाओं को लत और आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद करेगा। समाज में कई परिवारों ने ऑनलाइन जुए की वजह से मानसिक और आर्थिक संकट झेले हैं।
उद्योग जगत की चिंता
दूसरी ओर, फैंटेसी स्पोर्ट्स और रियल मनी गेमिंग कंपनियां जैसे Dream11, MPL, Zupee, Games24x7 आदि पर सीधा असर पड़ा है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि:
लगभग 400 से ज्यादा कंपनियां बंद होने के कगार पर हैं।
लाखों लोगों की नौकरियां खतरे में आ सकती हैं।
विदेशी निवेशक पीछे हट सकते हैं।
क्रिकेट और अन्य खेलों की स्पॉन्सरशिप पर गंभीर असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि प्रतिबंध से खिलाड़ी अवैध विदेशी वेबसाइट्स की ओर जा सकते हैं।
राजनीतिक असहमति
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम और शशि थरूर जैसे नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना पर्याप्त चर्चा और समीक्षा के ऑनलाइन गेमिंग बिल पास किया है। उन्होंने इसे संसदीय समिति को भेजने की मांग की थी।
क्रिकेट स्पॉन्सरशिप पर असर
भारत में क्रिकेट की कमाई का बड़ा हिस्सा फैंटेसी स्पोर्ट्स कंपनियों से आता है।
Dream11 भारतीय क्रिकेट टीम का टाइटल स्पॉन्सर था, जिसका अनुबंध लगभग ₹358 करोड़ का था।
My11Circle आईपीएल में ₹625 करोड़ का करार कर चुका था।
अब इन स्पॉन्सरशिप पर संकट गहराने की संभावना है।
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ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध भारत
ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन और रेगुलेशन) विधेयक 2025
भारत में फैंटेसी गेमिंग बैन
ई-स्पोर्ट्स को मान्यता भारत
नेशनल गेमिंग अथॉरिटी इंडिया
निष्कर्ष
ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन और रेगुलेशन) विधेयक 2025 भारत में ऑनलाइन गेमिंग की तस्वीर बदलने वाला साबित हो सकता है। जहां यह कानून पैसों पर आधारित खेलों पर पूरी तरह रोक लगाता है, वहीं ई-स्पोर्ट्स और शैक्षिक गेमिंग को प्रोत्साहन देता है। इसका मकसद युवाओं और समाज को सुरक्षित रखना है, लेकिन इससे बड़े पैमाने पर कंपनियों और खेल प्रायोजन पर असर पड़ेगा।
यह कानून भारत के डिजिटल भविष्य में एक नया अध्याय जोड़ता है—जहां जिम्मेदारी, पारदर्शिता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
