
लगातार 4,078 दिन देश के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए मोदी ने रचा इतिहास: इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़ा और भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बन गए। अब मोदी से आगे केवल देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू हैं, जो 6,130 दिन तक पद पर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
मोदी का ऐतिहासिक राजनीतिक सफर
नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने लगातार 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों में जीत दर्ज की, जिससे वे स्वतंत्रता के बाद जन्में पहले और सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गैर-कांग्रेस प्रधानमंत्री बन गए हैं। इंदिरा गांधी ने जनवरी 1966 से मार्च 1977 तक 4,077 दिन लगातार प्रधानमंत्री पद संभाला था, जिसे मोदी ने अब पार कर लिया है।
भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री
| स्थान | प्रधानमंत्री | पार्टी | निरंतर कार्यकाल | कुल लगातार दिन |
| 1 | जवाहरलाल नेहरू | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस| 15 अगस्त 1947 – 27 मई 1964 | 6,130 |
| 2 | नरेंद्र मोदी | भारतीय जनता पार्टी | 26 मई 2014 – वर्तमान | 4,078 |
| 3 | इंदिरा गांधी | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस| 24 जनवरी 1966 – 24 मार्च 1977| 4,077 |
यह उपलब्धि क्यों है खास?
**राजनीतिक स्थिरता**: मोदी का यह रिकॉर्ड भारतीय लोकतंत्र में स्थायित्व और निरंतरता का प्रतीक है, जब विश्व के कई देशों में नेतृत्व बार-बार बदलता रहता है।
**दीर्घकालिक नीति प्रभाव**: इतने लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने से मोदी सरकार को डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत, जीएसटी जैसे बड़े सुधारों को लागू करने और विदेश नीति में बदलाव लाने का अवसर मिला।
**व्यक्तिगत राजनीतिक दृढ़ता**: मोदी की लोकप्रियता, पार्टी की मजबूत रणनीति, और बदलते राजनीतिक माहौल के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता की झलक इस उपलब्धि में दिखाई देती है।
नेहरू और इंदिरा गांधी से तुलना
**नेहरू जी** भारत के पहले प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने लगातार 6,130 दिन देश का नेतृत्व किया और आधुनिक भारत की नींव रखी।
**इंदिरा गांधी** दो बार प्रधानमंत्री रहीं, हालांकि उनकी सबसे लंबी एकल अवधि 4,077 दिन की थी, जिसे नरेंद्र मोदी ने अब पार कर लिया है।
आगे क्या?
अगर नरेंद्र मोदी अपना तीसरा कार्यकाल पूरा करते हैं, तो वे 5,400 से अधिक लगातार दिन प्रधानमंत्री पद पर रहेंगे, जो उन्हें नेहरू के रिकॉर्ड के करीब पहुंचा देगा। हालांकि, नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए उन्हें चौथी बार भी प्रधानमंत्री बनना होगा।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी का यह नया रिकॉर्ड न केवल उनकी राजनीतिक मजबूती का परिचायक है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय भी जोड़ता है। अब पूरा देश देख रहा है कि क्या वे नेहरू का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी तोड़ पाएंगे।
**यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र के विकास और नेताओं के संघर्ष की कहानी को भी आगे बढ़ाती है।**