₹1,300 करोड़ का Aditya infotech IPO पहले ही दिन हुआ पूरा सब्सक्राइब, रिटेल निवेशकों ने दिखाई जबरदस्त दिलचस्पी!

₹1,300 करोड़ का Aditya infotech IPO पहले ही दिन हुआ पूरा सब्सक्राइब, रिटेल निवेशकों ने दिखाई जबरदस्त दिलचस्पी!


देश की अग्रणी सीसीटीवी और सुरक्षा उत्पाद निर्माता कंपनी का Aditya infotech ipo (CP Plus ब्रांड के तहत) ₹1,300 करोड़ का पहले ही दिन यानी **29 जुलाई 2025** को पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। इस IPO को रिटेल निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिन्होंने अपने आवंटित हिस्से को **3.5 गुना से ज्यादा** सब्सक्राइब किया।

पहला दिन: सब्सक्रिप्शन का हाल


**रिटेल निवेशकों का दबदबा:** IPO के पहले दिन दोपहर तक रिटेल कटेगरी ने 3.5 गुना से लेकर 4.4 गुना तक आवेदन कर दिए। नॉन-इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) की ओर से 1.4x से 1.7x सब्सक्रिप्शन हुआ, जबकि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) की भागीदारी अभी तक केवल 1% ही रही।

**ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP):** ग्रे मार्केट में Aditya infotech IPO के प्रति काफी उत्साह देखा जा रहा है, जहां शेयर का प्रीमियम **₹240 से ₹263** तक चल रहा है। यह प्रीमियम ऊपरी प्राइस बैंड **₹675** के मुकाबले देखा गया है, जिससे लिस्टिंग के समय करीब **39% तक** का मुनाफा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

**एंकर निवेशकों से शानदार रिस्पॉन्स:** Aditya infotech IPO खुलने से पहले ही कंपनी ने **₹582 करोड़** जुटा लिए थे। इनमें नाम शामिल हैं – **Government of Singapore, Goldman Sachs, HDFC Mutual Fund**, और **Abu Dhabi Investment Authority** जैसे दिग्गज निवेशकों का।

✅ Aditya infotech IPO की मुख्य विशेषताएं


**कुल आकार:** ₹1,300 करोड़
अ – ₹500 करोड़ — नया इक्विटी इश्यू
ब – ₹800 करोड़ — प्रोमोटर की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS)

**प्राइस बैंड:** ₹640–₹675 प्रति शेयर
**लॉट साइज:** 22 शेयर (लगभग ₹14,850 न्यूनतम निवेश)
**बोली की अवधि:** 29 जुलाई से 31 जुलाई तक
**लिस्टिंग की संभावित तारीख:** 5 अगस्त 2025
**लीड मैनेजर:** ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल

📈 निवेशकों के लिए क्यों खास है यह IPO?


**बाजार में अग्रणी स्थिति:** CP Plus ब्रांड के तहत आदित्य इंफोटेक सिक्योरिटी और निगरानी उत्पादों में भारत की प्रमुख कंपनी है। इसके उत्पादों का उपयोग सरकारी से लेकर व्यक्तिगत व औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है।

**मजबूत वित्तीय प्रदर्शन:** कंपनी का मुनाफा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है और इसके पास खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल को समर्थन देती है।

**भविष्य की संभावनाएं:** भारत में सुरक्षा की मांग बढ़ रही है – खासकर शहरीकरण, स्मार्ट सिटी योजनाओं और संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर में निगरानी बढ़ने के कारण।

**इरादा साफ – कर्ज घटाना:** Aditya infotech IPO से जुटाई गई राशि का अधिकांश हिस्सा कंपनी अपने कर्ज को कम करने में लगाएगी, जिससे बैलेंस शीट मजबूत होगी और विकास के लिए अधिक संसाधन मिलेंगे।

👥 निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें


**मांग ज्यादा, शेयर सीमित:** रिटेल श्रेणी में 3.5x से ज्यादा की सब्सक्रिप्शन के चलते कई छोटे निवेशकों को आंशिक या शायद कोई अलॉटमेंट न मिले।

**मूल्यांकन पर नज़र:** बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनी की स्थिति मजबूत है, लेकिन कुछ चेतावनी दे रहे हैं कि मूल्यांकन (Valuation) थोड़ा ऊँचा हो सकता है।

**ब्रोकरेज की राय:** ज़्यादातर वित्तीय सलाहकारों ने ‘**लॉन्ग टर्म के लिए सब्सक्राइब करें**’ की सलाह दी है।

🧾 निष्कर्ष


Aditya infotech IPO दिन की शुरुआत में ही ओवरसब्सक्राइब होना भारतीय निवेशकों के बीच सुरक्षा तकनीकी कंपनियों के प्रति भरोसे को दर्शाता है। मजबूत वित्तीय स्थिति, बाजार में स्पष्ट लीडरशिप और उच्च GMP इस IPO को एक आकर्षक निवेश अवसर बना रहा है। 5 अगस्त को सूचीबद्ध होने से पहले यह IPO खुद ही एक सफल मुद्दा बन चुका है।

**निवेश से पहले, आवश्यक वित्तीय सलाह अवश्य लें।**

मोदी का भारत बनाम इंदिरा का इंडिया: 11 वर्षों में भारत की दिशा और दशा का मूल्यांकन!

मोदी का भारत बनाम इंदिरा का इंडिया: 11 वर्षों में भारत की दिशा और दशा का मूल्यांकन!


भारत की राजनीति में दो ऐसे नेता हुए हैं जिनकी नीतियों, फैसलों और नेतृत्व शैली ने देश के स्वरूप को गहराई से प्रभावित किया। मोदी का भारत बनाम इंदिरा का इंडिया: इसमें एक थीं इंदिरा गांधी और दूसरे हैं नरेंद्र मोदी। दोनों नेताओं ने अपने-अपने काल में 11-11 वर्ष शासन किया और भारत को एक नई दिशा देने का प्रयास किया। आइए, राजनीति, विदेश नीति, आर्थिक दृष्टिकोण, सामाजिक बदलाव, शिक्षा और संविधानिक घटनाओं के आधार पर इन दोनों युगों की व्यापक तुलना करते हैं।

🏛️ राजनीति: सत्ता का संचालन और जन समर्थन


इंदिरा गांधी ने 1971 में ऐतिहासिक चुनाव जीतकर सत्ता संभाली। बांग्लादेश युद्ध के बाद उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुंची। हालांकि 1975 में लगाए गए आपातकाल के कारण लोकतंत्र पर बड़ा संकट आया, जिससे उनकी छवि को नुकसान हुआ।

नरेंद्र मोदी ने 2014 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में प्रवेश किया और 2019 में फिर मजबूत जनादेश प्राप्त किया। डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के जरिए उन्होंने जनता को जोड़ने का प्रयास किया। लेकिन CAA, NRC और कृषि कानूनों पर हुए विरोध ने उनकी नीतियों को कटघरे में भी खड़ा किया।

🌐 विदेश नीति: वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति


इंदिरा गांधी के समय भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन का सक्रिय हिस्सा था। 1971 में सोवियत संघ के साथ की गई मैत्री संधि और बांग्लादेश का निर्माण उनकी प्रमुख कूटनीतिक उपलब्धियां रहीं।

नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति ने नया आकार लिया। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई। QUAD और G20 जैसे मंचों पर भारत की भूमिका निर्णायक बनी। रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत का संतुलित रवैया भी चर्चा में रहा।

📈 अर्थव्यवस्था: विकास की रफ्तार और चुनौतियाँ


इंदिरा युग में समाजवाद की ओर झुकाव था। बैंकों का राष्ट्रीयकरण और सरकारी नियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था प्रमुख थी, लेकिन GDP वृद्धि दर सीमित रही। बेरोजगारी और महंगाई बड़ी समस्याएं थीं।

मोदी युग में आर्थिक सुधारों को गति मिली। GST, डिजिटल ट्रांजैक्शन और स्टार्टअप इंडिया जैसे कदमों से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिला। कोविड-19 और नोटबंदी जैसे झटकों से अस्थायी रुकावटें आईं, लेकिन भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हुआ।

🧑‍🤝‍🧑 सामाजिक परिवर्तन: कल्याणकारी योजनाएं और समाज में प्रभाव


इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया। दलित और पिछड़े वर्गों के लिए योजनाएं शुरू हुईं। हालांकि नसबंदी अभियान जैसे कदमों से विवाद खड़ा हुआ।

मोदी सरकार ने उज्ज्वला योजना, पीएम आवास योजना, आयुष्मान भारत और स्वच्छ भारत अभियान के जरिए गरीब और ग्रामीण जनता को लाभ पहुंचाया। लेकिन कुछ नीतियों पर धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोप भी लगे।

🎓 शिक्षा और विज्ञान: नीति और नवाचार


इंदिरा युग में भारत ने 1974 में पहला परमाणु परीक्षण कर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन किया। ISRO और DRDO जैसे संस्थानों का विकास हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति सीमित रही।

मोदी युग में नई शिक्षा नीति 2020 लागू की गई, जिसमें स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल शिक्षा और मातृभाषा को बढ़ावा दिया गया। चंद्रयान-3 और गगनयान जैसे मिशनों ने भारत को वैज्ञानिक दृष्टि से वैश्विक मंच पर मजबूत किया।

⚖️ संविधान और संस्थाएं: लोकतंत्र की परीक्षा


इंदिरा गांधी के कार्यकाल में आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का निलंब, प्रेस सेंसरशिप और विपक्ष की आवाज को दबाने जैसे कदम उठाए गए।

मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाने, तीन तलाक कानून और CAA जैसे बदलावों से अपनी निर्णायक नीति दर्शाई। लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर आलोचनाएं भी सामने आईं।

📊 मोदी का भारत बनाम इंदिरा का इंडिया: मुख्य तुलना सारांश


क्षेत्र इंदिरा गांधी (1971–1982) नरेंद्र मोदी (2014–2025)

शासन शैली केंद्रीकृत, समाजवादी निर्णायक, तकनीक और बाज़ार उन्मुख
विदेश नीति गुटनिरपेक्ष आंदोलन, सोवियत सहयोग वैश्विक साझेदारी, QUAD, G20
आर्थिक दिशा राष्ट्रीयकरण, धीमी वृद्धि उदारीकरण, तेज विकास दर
सामाजिक प्रभाव गरीबी हटाओ, नसबंदी जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत
शिक्षा और विज्ञान पोखरण परीक्षण, ISRO विकास NEP 2020, चंद्रयान, डिजिटल शिक्षा
संविधानिक घटनाएं आपातकाल, 42वां संशोधन अनुच्छेद 370, CAA, तीन तलाक कानून

🔚 निष्कर्ष: दो युग, दो दृष्टिकोण


इंदिरा गांधी और नरेंद्र मोदी दोनों ने भारत को अपने-अपने ढंग से प्रभावित किया। इंदिरा का युग नियंत्रण और केंद्रित सत्ता का था, जबकि मोदी का युग टेक्नोलॉजी और वैश्विक आकांक्षाओं का प्रतीक है। दोनों के निर्णयों से भारत को सीखने का अवसर मिला — और लोकतंत्र की मजबूती इसी सीख पर निर्भर करती है।