मराठी अभिनेत्री Jyoti Chandekar का 68 वर्ष की आयु में निधन, धारावाहिक *थरला तार मग* में “पूर्णा आजी” की भूमिका से मिली थी पहचान!

मराठी अभिनेत्री Jyoti Chandekar का 68 वर्ष की आयु में निधन, धारावाहिक *थरला तार मग* में “पूर्णा आजी” की भूमिका से मिली थी पहचान!

मराठी अभिनेत्री Jyoti Chandekar का निधन। थरला तार मग की ‘पूर्णा आजी’ के रूप में यादगार भूमिका, बेटी तेजस्विनी पंडित ने दी पुष्टि।

मराठी मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। मराठी टीवी और फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री Jyoti Chandekar का शनिवार रात 68 साल की उम्र में निधन हो गया।

उनके निधन की जानकारी उनकी बेटी और प्रसिद्ध अभिनेत्री **तेजस्विनी पंडित** ने साझा की है। चांदेकऱ के अचानक चले जाने से पूरी इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है।

रंगमंच से शुरू हुआ करियर, टीवी और सिनेमा में बनाई पहचान


Jyoti Chandekar ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत **मराठी रंगमंच** से की थी। रंगभूमि पर उनकी संवाद-अभिव्यक्ति और भावनात्मक गहराई ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों और धारावाहिकों की ओर रुख किया और वहाँ भी उन्होंने अपनी अदाकारी से गहरी छाप छोड़ी।

टीवी पर उनकी लोकप्रियता तब चरम पर पहुँची जब उन्होंने **ज़ी मराठी** के मशहूर पारिवारिक धारावाहिक *थरला तार मग* में **पूर्णा आजी** की भूमिका निभाई। यह किरदार उनके करियर का पहचान बन गया। उनकी सहज और दिल छू लेने वाली अदाकारी ने दर्शकों को अपने असली दादी-नानी की याद दिला दी।

मराठी सिनेमा और रंगभूमि में योगदान


टेलीविजन के अलावा Jyoti Chandekar ने कई मराठी फिल्मों में अहम भूमिकाएँ निभाईं। ज्यादातर उन्होंने माँ और दादी जैसे शांत लेकिन मजबूत स्वभाव वाले किरदारों को जीवंत किया। उनकी अदाकारी दर्शकों के लिए इतनी जुड़ी हुई थी कि लोग स्क्रीन पर उन्हें अपनी ही परिवार का हिस्सा मान लेते थे।

रंगमंच पर भी उनकी उपस्थिति बेहद प्रभावशाली रही। मंच नाटकों में उनकी संवाद अदायगी, गहन भाव और बारीकियों का अभिनय, उन्हें अलग ही ऊँचाई पर ले गया। **उनकी सबसे बड़ी खूबी थी पात्रों को बेहद सच्चाई और सरलता से लोगों तक पहुँचाना।**

माँ–बेटी का विशेष रिश्ता: Jyoti Chandekar और तेजस्विनी पंडित


ज्योति चांदेकऱ की बेटी **तेजस्विनी पंडित** भी मराठी इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं। माँ–बेटी दोनों ही अलग-अलग समय पर मराठी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना चुकी हैं। तेजस्विनी ने कई बार यह स्वीकार किया था कि उनकी माँ ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।

ज्योति चांदेकऱ के निधन से तेजस्विनी के जीवन में गहरा व्यक्तिगत आघात पहुँचा है। अभिनय की दुनिया में दोनों की मौजूदगी हमेशा दर्शकों के लिए गर्व की बात रही, लेकिन अब यह बंधन केवल यादों में ही रहेगा।

शोक संदेशों की बाढ़


जैसे ही उनके निधन की खबर आई, सोशल मीडिया पर शोक संवेदनाओं की बाढ़ आ गई। फिल्म और टीवी जगत के कई जाने-माने चेहरों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके साथ बिताए पलों को याद किया।

*थरला तार मग* के सह-कलाकारों ने याद किया कि किस तरह वे सेट पर सभी को एक परिवार जैसा माहौल देती थीं। युवा कलाकारों का मार्गदर्शन करना उनकी आदत थी। प्रशंसकों ने लिखा कि **”पूर्णा आजी अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमेशा रहेंगी।”**

“पूर्णा आजी”: एक यादगार किरदार


टीवी धारावाहिक *थरला तार मग* में Jyoti Chandekar द्वारा निभाया गया **पूर्णा आजी का किरदार** किसी साधारण भूमिका से कहीं आगे बढ़कर दर्शकों के दिल में बस गया।

पूर्णा आजी दर्शकों के लिए सिर्फ एक दादी का किरदार नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों के महत्व और उनकी जीवन-दृष्टि का प्रतीक बन गया। उनकी भूमिका ने यह संदेश दिया कि परिवार में बड़ों का स्थान अमूल्य होता है।

अभिनय का अनोखा अंदाज़


Jyoti Chandekar उन कलाकारों में गिनी जाती थीं, जिनकी कला का आधार **सादगी और भावनात्मक सच्चाई** थी। वे स्टारडम से दूर रहते हुए भी दर्शकों के दिलों में बसे रहीं। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।

चार दशकों से भी अधिक समय तक सक्रिय रहते हुए उन्होंने साबित किया कि असली कलाकार वही है जो हर किरदार में सच्चाई उतार दे और दर्शक उससे खुद को जोड़ सके।

एक युग का अंत


68 साल की उम्र में Jyoti Chandekar का जाना मराठी मनोरंजन उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति है। वे अपने पीछे अभिनय की एक समृद्ध धरोहर छोड़ गई हैं। छोटे और बड़े पर्दे पर उनके द्वारा निभाए गए किरदार सदैव उनकी याद दिलाते रहेंगे।

उनके निधन के साथ एक युग का अंत महसूस किया जा रहा है। जहाँ तेजस्विनी पंडित और उनका परिवार इस निजी नुकसान से गुजर रहा है, वहीं दर्शक और पूरी इंडस्ट्री उनके योगदान को सलाम कर रही है।

निष्कर्ष


Jyoti Chandekar का निधन
मराठी कला और मनोरंजन जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। *थरला तार मग* की “पूर्णा आजी” के रूप में उन्होंने जो स्थान दर्शकों के दिलों में बनाया, वह हमेशा कायम रहेगा। उनकी सरलता, सहज अभिनय शैली और मानवीय दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।

भले ही आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अदाकारी और उनका अपनापन हमेशा याद किया जाएगा।

मशहूर मिमिक्री कलाकार और अभिनेता Kalabhavan Navas होटल में मृत पाए गए, फिल्मी दुनिया में शोक की लहर!

मशहूर मिमिक्री कलाकार और अभिनेता Kalabhavan Navas होटल में मृत पाए गए, फिल्मी दुनिया में शोक की लहर!


मलयालम सिनेमा के जाने-माने मिमिक्री कलाकार और अभिनेता Kalabhavan Navas शुक्रवार को कोच्चि के एक होटल में मृत पाए गए। 51 वर्षीय नवास के असामयिक निधन से मनोरंजन जगत सदमे में है।


मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को शुक्रवार को एक बड़ा झटका लगा जब मशहूर अभिनेता और मिमिक्री आर्टिस्ट Kalabhavan Navas का शव कोच्चि के चोत्तानिक्करा स्थित एक होटल में पाया गया। वे उस होटल में एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में ठहरे हुए थे। उनकी उम्र 51 वर्ष थी।

यह दुखद घटना तब सामने आई जब होटल स्टाफ ने देखा कि नवास लंबे समय से अपने कमरे से बाहर नहीं आए थे और ना ही किसी कॉल का जवाब दे रहे थे। कर्मचारियों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का दरवाजा खोलने के बाद पाया कि नवास अचेत अवस्था में थे। उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

प्रारंभिक जांच और संभावित कारण



पुलिस ने प्रारंभिक जांच में बताया कि घटना में किसी तरह की साजिश या बाहरी हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, मौत का सही कारण जानने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी अनुमान लगाया गया है कि उन्हें हृदयाघात (कार्डियक अरेस्ट) हो सकता है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

कौन थे Kalabhavan Navas?



कलाभवन नवास मलयालम सिनेमा और मंचीय मिमिक्री जगत का एक प्रतिष्ठित नाम थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रसिद्ध मिमिक्री ग्रुप कलाभवन से की थी, जहां से कई बड़े कलाकारों ने अपनी पहचान बनाई, जिनमें दिवंगत अभिनेता कलाभवन मणि भी शामिल हैं।

नवास की खासियत थी उनकी आवाज़ की विविधता और सटीक नकल, जिनकी बदौलत उन्होंने हजारों दर्शकों को हँसाया और सोचने पर मजबूर किया। उन्होंने अपने करियर में 50 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और कई टेलीविज़न कॉमेडी शोज़ में हिस्सा लिया।

कुछ यादगार फिल्में:

सीआईडी उनिकृष्णन बी.ए. बी.एड.

मीशा माधवन

पुलीवाल कल्याणम

थिलक्कम

चथिक्कथा चन्तु


हालाँकि वे मुख्य भूमिकाओं में कम नजर आए, लेकिन सह-कलाकार के रूप में उनका योगदान हमेशा सराहनीय रहा।

मनोरंजन जगत में शोक की लहर



Kalabhavan Navas के निधन की खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर अभिनेता हरिश्री अशोकन, सलीम कुमार, और दिलिप जैसे दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उन्हें एक सरल, विनम्र और प्रतिभाशाली कलाकार बताया।

AMMA (Association of Malayalam Movie Artists) ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर नवास के योगदान को याद किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

निजी जीवन और अंतिम संस्कार



नवास अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। अंतिम संस्कार उनके गृहनगर त्रिशूर में किया जाएगा। उनके प्रशंसक, मित्र और सहकर्मी अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

अंतिम शब्द



Kalabhavan Navas भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा दिए गए हँसी के पल और अनगिनत किरदार मलयालम सिनेमा और मंचीय कला में सदैव जीवित रहेंगे। उनकी यह असमय विदाई हमें यह याद दिलाती है कि कलाकारों की अहमियत सिर्फ उनकी भूमिका में नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और प्रभाव में भी होती है।