Shibu Soren का निधन: झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ नहीं रहे, पूरे राज्य में शोक की लहर!

Shibu Soren का निधन: झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ नहीं रहे, पूरे राज्य में शोक की लहर!

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संरक्षक Shibu Soren का 81 वर्ष की आयु में निधन। पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने सर गंगाराम अस्पताल जाकर दी श्रद्धांजलि। पढ़ें पूरी रिपोर्ट उनके जीवन, संघर्ष और योगदान पर।


झारखंड के वरिष्ठ राजनेता, पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संरक्षक Shibu Soren का सोमवार की सुबह निधन हो गया। 81 वर्ष की उम्र में उन्होंने दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। पिछले कई हफ्तों से वह किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती थे।
उनके निधन की खबर से झारखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

आदिवासी पहचान के सबसे मजबूत स्तंभ



Shibu Soren को ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि से सम्मानित किया जाता था। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में आदिवासी समुदाय की आवाज़ को न सिर्फ बुलंद किया, बल्कि उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार संघर्ष किया।
वह झारखंड को अलग राज्य बनाने के आंदोलन के अगुवा थे, और उनके प्रयासों से यह सपना हकीकत बना।

Shibu Soren का संघर्ष और राजनीतिक सफर



वर्ष 1972 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नींव रखी।

उन्होंने संसद में कई बार झारखंड की जनता का प्रतिनिधित्व किया।

तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे।

केंद्र सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी कार्य किया।

उनका राजनीतिक जीवन आदिवासियों की ज़मीन, जंगल और अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित था।

देश भर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला



Shibu Soren के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू दोनों ने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,

> “Shibu Soren जी का जीवन सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा में समर्पित था। उनका योगदान देश कभी नहीं भुला पाएगा।”



राष्ट्रपति मुर्मू ने शोक व्यक्त करते हुए कहा,

> “Shibu Soren जी के निधन से आदिवासी समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची है। वह एक प्रेरणा स्रोत थे।”

हेमंत सोरेन के लिए व्यक्तिगत क्षति



झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री और Shibu Soren के पुत्र हेमंत सोरेन ने पिता के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा,

> “मेरे लिए यह सिर्फ पारिवारिक नहीं, बल्कि वैचारिक नुकसान है। उन्होंने जो आदर्श दिए, वह हमेशा मेरे मार्गदर्शक रहेंगे।”



राज्य सरकार ने राजकीय शोक की घोषणा की है और अंतिम संस्कार रांची में पूरे सरकारी सम्मान के साथ संपन्न होगा।

आदिवासी समाज में शोक का माहौल



Shibu Soren के निधन से आदिवासी समाज में गहरा शोक व्याप्त है। झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में लोग उन्हें जननेता और मसीहा के रूप में याद कर रहे हैं।
उनकी अंतिम यात्रा में लाखों समर्थकों के जुटने की संभावना है।

एक जीवन जो आदर्श बना


Shibu Soren का जीवन आदिवासियों की पीड़ा, संघर्ष और सम्मान का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा जल, जंगल, ज़मीन और अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई।
उनकी सोच और संघर्षों ने आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने का काम किया है।

Shibu Soren: एक दृष्टिपात



विवरण — जानकारी

जन्म– 11 जनवरी 1944, नेमरा गांव, झारखंड
राजनीतिक दल– झारखंड मुक्ति मोर्चा
पद– तीन बार मुख्यमंत्री, कई बार सांसद
निधन– 4 अगस्त 2025, दिल्ली
कारण– किडनी की समस्या
आयु– 81 वर्ष
उपाधि– दिशोम गुरु

निष्कर्ष: विरासत अमर रहेगी



Shibu Soren का जाना सिर्फ एक नेता का जाना नहीं, बल्कि एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक आवाज़ का मौन हो जाना है। उन्होंने झारखंड और आदिवासी समाज को जो पहचान दिलाई, वह हमेशा स्मरणीय रहेगी।
उनकी विरासत हेमंत सोरेन और अगली पीढ़ी के नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।



भारत के उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा, तुरंत प्रभाव से लागू!

भारत के उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा, तुरंत प्रभाव से लागू!


देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारत के उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 74 वर्षीय धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंपा, जो तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है।

स्वास्थ्य को दी प्राथमिकता


उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने अपने पत्र में लिखा, “चिकित्सकीय सलाह पर और गहन विचार-विमर्श के बाद, मैंने उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया है। इस समय मेरी प्राथमिकता मेरा स्वास्थ्य है।”

इस अचानक लिए गए फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि धनखड़ हाल के दिनों तक सक्रिय रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे।

राजनीतिक प्रतिक्रिया


देशभर से नेताओं ने धनखड़ के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके कार्यकाल की सराहना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankharने पूरी निष्ठा और गरिमा के साथ देश की सेवा की। मैं उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करता हूं।”

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने शुभकामनाएं और सम्मान प्रकट किए हैं।

कार्यकाल और योगदान


Jagdeep Dhankhar ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उनकी सक्रिय भूमिका और सरकार के साथ टकराव चर्चा का विषय बने थे।

एक अनुभवी वकील और नेता के रूप में उनकी पहचान रही है। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने राज्यसभा के सभापति के रूप में निष्पक्ष और सख्त संचालन के लिए विशेष रूप से सराहना प्राप्त की।

आगे क्या?


Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे के बाद अब यह पद रिक्त हो गया है। जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की तिथि घोषित की जा सकती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है।

नई नियुक्ति तक, संवैधानिक प्रावधानों के तहत इस पद से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन अंतरिम व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

निष्कर्ष


उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar का अचानक इस्तीफा न केवल राजनीतिक रूप से अहम है, बल्कि यह इस बात की भी याद दिलाता है कि स्वास्थ्य किसी भी पद से ऊपर होता है। उनके अब तक के कार्यकाल को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, विधायी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका और संतुलित नेतृत्व के लिए याद किया जाएगा।