
बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने भारत का पहला 70 मीटर हटाने योग्य सोलर पैनल सिस्टम शुरू किया। 28 पैनलों से 15kW स्वच्छ ऊर्जा पैदा होगी, जिससे भारतीय रेलवे 2030 तक नेट-जीरो कार्बन मिशन की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
भारत की रेलवे व्यवस्था ने हरित ऊर्जा (Green Energy) की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW), वाराणसी ने देश का पहला 70 मीटर हटाने योग्य (Removable) सोलर पैनल सिस्टम शुरू किया है।
यह नवाचार भारतीय रेल की सतत विकास (Sustainable Development) की सोच और 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर एक अहम उपलब्धि है।
परियोजना की खासियत
इस पैनल प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे आवश्यकता पड़ने पर आसानी से हटाया और पुनः लगाया जा सकता है। आमतौर पर रेलवे ट्रैक के बीच की जगह खाली रहती है, लेकिन बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने इस अनुपयोगी स्थान का बेहतर उपयोग कर 28 हाई-एफिशिएंसी सोलर पैनल लगाए हैं। यह प्रणाली 15 किलोवॉट (kW) स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कर सकती है।
प्रमुख फायदे:
जमीन का सही उपयोग: ट्रैक के बीच की खाली जगह का प्रभावी इस्तेमाल।
पर्यावरण हितैषी: कोयला और डीजल पर निर्भरता घटाकर कार्बन उत्सर्जन कम करना।
लचीली संरचना: पैनलों को ट्रैक मरम्मत के समय तुरंत हटाया जा सकता है और कार्य पूरा होने के बाद पुनः जोड़ा जा सकता है।
ऊर्जा की बचत: सीधे रेलवे परिसर में बिजली उत्पादन, जिससे ट्रांसमिशन लॉस कम होता है।
तकनीकी विशेषताएँ
यह प्रणाली आधुनिक तकनीक और टिकाऊ डिज़ाइन के साथ तैयार की गई है।
कुल 28 सोलर मॉड्यूल स्थापित।
70 मीटर लंबाई में फैला हुआ स्ट्रक्चर।
15 किलोवॉट क्षमता, जो सहायक रेलवे कार्यों के लिए पर्याप्त ऊर्जा देता है।
मॉड्यूलर और डिटैचेबल डिज़ाइन, जिसे जल्दी से हटाया और जोड़ा जा सकता है।
मौसम-रोधी निर्माण, जो धूप, बारिश और धूल जैसे हालातों में भी बेहतर कार्य करता है।
भारतीय रेलवे का हरित मिशन
भारतीय रेलवे का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल किया जाए। इसके लिए कई पहलें पहले से जारी हैं:
रेलवे स्टेशनों पर रूफटॉप सोलर प्लांट्स।
कुछ रेलगाड़ियों में सौर ऊर्जा आधारित कोचों का प्रयोग।
100% विद्युतीकरण की दिशा में तेज़ी से काम।
बनारस लोकोमोटिव वर्क्स जैसे उत्पादन केंद्रों पर ऊर्जा दक्ष लोकोमोटिव का निर्माण।
इस पैनल प्रणाली के जुड़ने से रेलवे की ग्रीन एनर्जी कैपेसिटी और मजबूत होगी।
पर्यावरण और आर्थिक लाभ
15 किलोवॉट का यह छोटा लेकिन नवाचारी संयंत्र, लंबे समय में बड़े बदलाव ला सकता है।
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी।
बिजली खर्च में बचत।
अन्य रेल जोन में भी लागू करने योग्य एक दोहराने योग्य मॉडल।
यदि इसी तरह की प्रणाली देशभर के यार्ड्स और रेलवे स्टेशनों पर लगाई जाती है, तो भारतीय रेलवे बड़ी मात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन करने में सक्षम होगा।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट को देशभर में आसानी से रेप्लिकेट (Replicate) किया जा सकता है।
इसे बड़े रेल वर्कशॉप्स और यार्ड्स में लगाया जा सकता है।
स्टेशन संचालन के लिए आवश्यक ऊर्जा की पूर्ति कर सकता है।
निजी निवेशकों और साझेदारियों को आकर्षित कर सकता है।
भारत ही नहीं, अन्य देशों के रेलवे नेटवर्क के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।
निष्कर्ष
बनारस लोकोमोटिव वर्क्स का यह 70 मीटर हटाने योग्य सोलर पैनल सिस्टम केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के हरित भविष्य की झलक है। यह प्रणाली यह साबित करती है कि सतत विकास और संचालन की लचीलापन एक साथ संभव है।
भारतीय रेलवे का यह कदम न सिर्फ पर्यावरण को सुरक्षित बनाएगा बल्कि देश को 2030 तक कार्बन-न्यूट्रल बनने के लक्ष्य के और करीब ले जाएगा।
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