ICICI bank minimum balance shoots up in 2025! जानें नए नियम, शुल्क और किस पर पड़ेगा असर?

ICICI bank minimum balance shoots up in 2025! जानें नए नियम, शुल्क और किस पर पड़ेगा असर?

ICICI बैंक ने 1 अगस्त 2025 से नए सेविंग्स अकाउंट के लिए न्यूनतम बैलेंस बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया है। कैसे आप ICICI bank minimum balance मेंटेन करके अतिरिक्त शुल्क से बच सकते हैं। जानें नए नियम, पेनल्टी और छूट।

1 अगस्त 2025 से ICICI बैंक ने अपने सेविंग्स और करेंट अकाउंट्स के लिए न्यूनतम बैलेंस की सीमा बढ़ा दी है। यह बड़ा बदलाव कई खाताधारकों के लिए जरूरी बन गया है कि वे नए नियमों और संभावित शुल्क को अच्छी तरह समझें और अपने खातों का सही से प्रबंधन करें।

न्यूनतम बैलेंस क्या है और क्यों जरूरी है?


**न्यूनतम बैलेंस** वह राशि है जो ग्राहकों को अपने बैंक खाते में हमेशा बनाए रखना होता है। इससे उनका खाता चालू रहता है और वे पेनल्टी से बच सकते हैं। अलग-अलअग प्रकार के खातों और ब्रांच लोकेशन के अनुसार यह राशि भिन्न होती है।

ICICI बैंक के नए नियमों के अनुसार, खाताधारकों को अपनी राशि का ध्यान रखकर अकाउंट को मेनटेन करना होगा ताकि अनचाही फीस न लगे।

ICICI bank minimum balance for 2025: नई सीमा


सेविंग्स अकाउंट (1 अगस्त 2025 के बाद खोले गए नए खाते)

| ब्रांच स्थान | नया मासिक औसत बैलेंस (MAB) | पूर्व MAB | बैलेंस न रखने पर पेनल्टी |


| मेट्रो / शहरी | ₹50,000 | ₹10,000 | कमी का 6% या ₹500 (जो कम हो) |
| अर्ध-शहरी | ₹25,000 | ₹5,000 | कमी का 6% या ₹500 (जो कम हो) |
| ग्रामीण | ₹10,000 | ₹2,500 | कमी का 6% या ₹500 (जो कम हो) |

ध्यान दें: मौजूदा खाताधारकों पर ये बदलाव लागू नहीं हैं, उनके खाते पुराने नियमों के अनुसार चलते रहेंगे।

करेंट अकाउंट्स

ICICI bank minimum balance for current account: खाते के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हैं:

| अकाउंट प्रकार | न्यूनतम बैलेंस शर्त |
| Roaming Standard | ₹10,000 (मासिक) |
| iStartup Silver / Classic | ₹25,000 (त्रैतीय) |
| Smart Business Silver /Classic | ₹25,000–₹50,000 (त्रैतीय) |
| Roaming Gold / Smart Business Gold | ₹1,00,000 (मासिक/त्रैतीय) |
| Premium & Wealth/Private Banking | कोई मिनिमम बैलेंस नहीं |

कुछ स्टार्टअप/नया बिजनेस खाते शुरुआत के महीनों में ‘जीरो बैलेंस’ सुविधा भी देते हैं।

न्यूनतम बैलेंस की गणना कैसे होती है?


1- सेविंग्स अकाउंट: हर दिन के एंड ऑफ डे बैलेंस को जोड़कर महीने के दिनों से भाग देकर मासिक औसत बैलेंस निकाला जाता है।
2- करेंट अकाउंट: त्रैतीय या मासिक औसत बैलेंस की डिमांड हो सकती है।

बैलेंस नहीं रखने पर क्या होगा?


अगर आप आवश्यक मिनिमम बैलेंस नहीं रख पाते, तो ICICI बैंक जुर्माना लेता है:

कमी का 6% या ₹500, जो भी कम हो।

जैसे यदि आपके खाते में ₹50,000 होना चाहिए, लेकिन आपने ₹40,000 ही रखा, तो कमी ₹10,000 है। 6% यानी ₹600 होता है लेकिन ₹500 कम है, तो ₹500 पेनल्टी कट जाएगी।

बार-बार बैलेंस न रखने पर आगे चलकर खाता सस्पेंड या बंद भी हो सकता है।

2025 में ICICI बैंक ने बैलेंस क्यों बढ़ाया?


– प्रीमियम ग्राहकों को आकर्षित करना: बैंक चाहती है कि खातेदार बड़े और स्थायी बैलेंस रखें।
– ज्यादा जमा जुटाना: इससे बैंक को ऑपरेशनल सुविधा मिलती है।
– बाजार रुझान: कुछ सरकारी बैंक ने मिनिमम बैलेंस कम कर दिया है पर निजी बैंक प्रीमियम सेगमेंट का टारगेट कर रहे हैं।
– ऑपरेशन लागत: छोटे बैलेंस वाले खाते बैंक के लिए महंगे पड़ते हैं। इसलिए न्यूनतम सीमा बढ़ाई गई।

छूट और विशेष स्थितियां


– मौजूदा ग्राहक: पुराने नियम के तहत चलते रहेंगे।
– पेंशनधारी और वरिष्ठ नागरिक: कुछ शर्तों पर पेनल्टी से छूट।
– बीएसबीडीए (Basic Savings Bank Deposit Account): कोई मिनिमम बैलेंस नहीं, पर सुविधाएं सीमित।
– सैलरी खाते: जब तक सैलरी आती है, तब तक छूट।
– स्टार्टअप खाते: शुरुआत में छूट मिल सकती है।

लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क


बैंक ने कुछ ट्रांजेक्शन फीस भी अपडेट की हैं:

– कैश जमा/निकासी: 1 महीने में 3 बार मुफ्त; उसके बाद हर ट्रांजेक्शन पर ₹150।
– मुफ्त लेनदेन सीमा: 1 लाख /महीना फ्री; अधिक रकम पर ₹3.5 प्रति ₹1,000 या ₹150, जो कम हो।

इसलिए ट्रांजेक्शन करने से पहले बार-बार सोचना जरूरी है।

ग्राहकों पर प्रभाव और शुल्क बचाने के सुझाव


नये नियम मेट्रो व शहरी क्षेत्रों के लिए नया चैलेंज हैं। ₹50,000 मिनिमम बैलेंस बनाये रखना सभी के लिए आसान नहीं है, खासकर वेतनभोगियों या छोटे निवेशकों के लिए। ग्राहकों पर प्रभाव और शुल्क बचाने के सुझाव

आप चाहें तो:

– दूसरे बैंक या फिनटेक में **जीरो बैलेंस खाते** खोलें।
– **बीएसबीडीए खाते** चुनें, अगर योग्य हैं।
– मोबाइल या बैंक ऐप से बैलेंस अलर्ट लगाएं।
– सैलरी खाते का प्रयोग नियमित करें।
– ट्रांजेक्शन की गिनती व लिमिट पर ध्यान दें।

मुख्य बातें


ICICI bank minimum balance shoots up in 2025! बैंक ने 2025 में सेविंग्स अकाउंट के लिए न्यूनतम बैलेंस की राशि बढ़ा दी है।
– बैलेंस न रखने पर 6% कमी या ₹500 तक पेनल्टी लगेगी।
– पुराने ग्राहक अभी सुरक्षित हैं, लेकिन भविष्य में बदलाव संभव।
– BSBDA या सैलरी खाते बेहतर विकल्प हो सकते हैं शुल्क से बचने के लिए।
– स्मार्ट तरीके से खाते को मॉनिटर करें और फालतू शुल्क से बचें।

निष्कर्ष


ICICI बैंक के नए नियम बैंक को मजबूत तो बनायेंगे, लेकिन सामान्य ग्राहकों के लिए बड़ी राशि अकाउंट में रखना जरूरी होगा। आपको अपने खाते और बैलेंस की नियमित जांच करनी चाहिए ताकि किसी भी अनचाही फीस से बचा जा सके।

अपने बैंक की नियमावली और बदलावों की जानकारी रखें, ताकि आपके पैसे सुरक्षित रहें और आप बैंकिंग को आसान बना सकें।

यह जानकारी आपको ICICI bank minimum balance नियमों की सही समझ देगी—सतर्क रहें, स्मार्ट रहें!

Trump tariffs india: ट्रंप के 25% अतिरिक्त टैरिफ की धमकी से भारत की अर्थव्यवस्था और निर्यात पर मंडरा रहा खतरा!

Trump tariffs india: ट्रंप के 25% अतिरिक्त टैरिफ की धमकी से भारत की अर्थव्यवस्था और निर्यात पर मंडरा रहा खतरा!


Trump tariffs india: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से कच्चे तेल खरीदने पर भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने की धमकी से भारतीय निर्यात और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। जानें विशेषज्ञों की राय और संभावित प्रभाव।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रूस से भारत के तेल व्यापार को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर भारत रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखता है, तो अमेरिका भारत के निर्यात पर 25% अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगा सकता है। हालांकि ये फिलहाल कोई आधिकारिक नीति नहीं है, लेकिन अगर इस प्रकार की कार्रवाई की जाती है तो भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों पर गहरा असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है, लेकिन अगर यह वास्तव में लागू होता है, तो इसका भारतीय अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

🔍Trump tariffs india: ट्रंप ने क्या कहा?


एक चुनावी रैली के दौरान, ट्रंप ने इशारा किया कि जो देश रूस से तेल खरीदना जारी रखते हैं, उन पर अमेरिका सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने विशेष रूप से भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर वह रूस से व्यापार करता रहा, तो उसके उत्पादों पर 25% आयात शुल्क लगाया जाएगा।

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने टैरिफ को कूटनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने चीन के खिलाफ इसी तरह का रुख अपनाया था, जिससे वैश्विक व्यापार युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी।

🔗 भारत-रूस कच्चे तेल व्यापार की पृष्ठभूमि


रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है। रूस भारत को डिस्काउंटेड दरों पर तेल बेचता है, जिससे भारत को आर्थिक रूप से लाभ हुआ है। भारत ने बार-बार कहा है कि यह व्यापार ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के तहत किया जा रहा है और यह किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करता।

📉 भारत पर संभावित आर्थिक प्रभाव


अगर ट्रंप का प्रस्तावित टैरिफ लागू हो जाता है, तो इसके कई नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं:

1. निर्यात पर असर

भारत अमेरिका को सालाना लगभग $78 अरब मूल्य के उत्पाद निर्यात करता है। इनमें मुख्य रूप से:

वस्त्र और रेडीमेड गारमेंट्स

दवाइयाँ और फार्मास्यूटिकल उत्पाद

मशीनरी और इंजीनियरिंग गुड्स

आईटी सेवाएं शामिल हैं।


25% अतिरिक्त शुल्क इन उत्पादों को अमेरिकी बाजार में कम प्रतिस्पर्धी बना सकता है, जिससे:

निर्यात घट सकता है

रोजगार पर असर पड़ सकता है

विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हो सकता है


2. व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा

यदि भारत भी जवाबी कदम उठाता है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है।

3. निवेशकों की चिंता

अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव से वैश्विक निवेशकों का विश्वास कमजोर हो सकता है, खासकर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में।

4. रुपये में गिरावट

निर्यात में गिरावट से डॉलर की आमद घट सकती है, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है। इससे भारत को आयात महंगा पड़ेगा, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम सेक्टर में।

🎯 विशेषज्ञों की राय: “दबाव की रणनीति”


अर्थशास्त्री और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की चुनावी रणनीति का हिस्सा है। कुछ प्रमुख प्रतिक्रियाएं:

डॉ. अरविंद पनगड़िया (पूर्व नीति आयोग उपाध्यक्ष) का कहना है:
“यह ट्रंप का परिचित तरीका है — पहले दबाव बनाओ, फिर बातचीत करो। भारत को सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन घबराने की नहीं।”

निशा बिस्वाल (U.S.-India Business Council की प्रमुख) कहती हैं:
“भारत और अमेरिका के रिश्ते इतने गहरे हैं कि ऐसे बयान लंबे समय के सहयोग को नुकसान नहीं पहुंचा सकते।

🇮🇳 Trump tariffs india: भारत की संभावित रणनीति


भारत संभवतः इस मुद्दे को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिश करेगा। संभावित कदम:

अमेरिका को भारत की ऊर्जा जरूरतों के बारे में समझाना

रूस से व्यापार पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना दिखाना

भारतीय प्रवासी और बिजनेस लॉबी का सहयोग लेना


साथ ही भारत:

वैकल्पिक निर्यात बाजारों जैसे यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण एशिया में अवसर तलाश सकता है

तेल आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाकर रूस पर निर्भरता घटा सकता है

🌐 Trump tariffs india का वैश्विक प्रभाव


अगर ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं और यह नीति लागू करते हैं, तो इसका असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा:

वैश्विक व्यापार तंत्र कमजोर हो सकता है

WTO जैसी संस्थाओं की भूमिका और प्रभाव पर प्रश्न उठ सकते हैं

BRICS जैसे गुटों की भूमिका और मजबूती बढ़ सकती है


भारत को फिर से संतुलन साधना पड़ेगा — पश्चिम और रूस के बीच।

🧠 निष्कर्ष


डोनाल्ड ट्रंप की यह धमकी फिलहाल नीति नहीं बल्कि राजनीति है, लेकिन भारत को इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका में नेतृत्व परिवर्तन होता है या नहीं, और इसके साथ भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों की दिशा क्या होगी।

भारत को अपनी रणनीति तैयार रखनी होगी — कूटनीति से लेकर व्यापार में विविधता तक — ताकि वह किसी भी आर्थिक दबाव का सामना मजबूती से कर सके।

📢 PM Kisan सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी: किसानों के खाते में पहुंचे ₹2000, जानिए पूरी डिटेल!

PM Kisan सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी: किसानों के खाते में पहुंचे ₹2000, जानिए पूरी डिटेल!

वाराणसी — देश के करोड़ों किसानों के लिए आज का दिन बड़ी सौगात लेकर आया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत 20वीं किस्त आज किसानों के खातों में भेज दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी से इस किस्त का शुभारंभ किया और खुद बटन दबाकर राशि ट्रांसफर की।

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा,

> “देश का किसान हमारे लिए सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का आधार भी है। इस योजना के माध्यम से हम किसानों को सीधा आर्थिक सहयोग पहुंचा रहे हैं।”

✅PM Kisan योजना का उद्देश्य क्या है?



PM Kisan सम्मान निधि योजना भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 में शुरू की गई थी। इसका मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देना है। हर पात्र किसान को साल में ₹6000 तीन किस्तों में दिए जाते हैं — हर चार महीने में ₹2000 की किस्त सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।

📅 20वीं किस्त का विवरण:



तारीख: 2 अगस्त 2025

राशि: ₹2000 प्रति किसान

लाभार्थी किसान: करीब 8.5 करोड़ से ज्यादा

कुल वितरित राशि: लगभग ₹17,000 करोड़

स्थान: वाराणसी, उत्तर प्रदेश

🔍 अपनी किस्त की स्थिति कैसे जांचें?



किसान यह जानने के लिए कि उनके खाते में राशि आई है या नहीं, निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:

1. वेबसाइट खोलें: https://pmkisan.gov.in


2. “Beneficiary Status” पर क्लिक करें।


3. अपना मोबाइल नंबर, आधार नंबर या बैंक खाता नंबर दर्ज करें।


4. “Get Data” पर क्लिक करें।


5. स्क्रीन पर आपकी किस्त की पूरी जानकारी दिखाई देगी।

🧾 किन किसानों को मिलेगा लाभ?



PM Kisan योजना का लाभ उन्हीं किसानों को दिया जाता है जो इन शर्तों को पूरा करते हैं:

उनके पास भूमि का वैध दस्तावेज होना चाहिए।

कोई भी इनकम टैक्सदाता किसान इस योजना के पात्र नहीं हैं।

परिवार में सरकारी नौकरी वाला सदस्य होने पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

ई-केवाईसी (e-KYC) पूर्ण होना आवश्यक है।

📌 ई-केवाईसी है जरूरी



अगर आपने अभी तक अपना e-KYC पूरा नहीं किया है, तो आपको किस्त नहीं मिलेगी। इसे आप निम्न माध्यमों से करा सकते हैं:

आधिकारिक पोर्टल पर जाकर OTP के माध्यम से।

नजदीकी CSC केंद्र पर जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन द्वारा।

🛠 ज़रूरी दस्तावेज़:



आधार कार्ड

भूमि रिकॉर्ड/खसरा नंबर

बैंक खाता विवरण

मोबाइल नंबर (आधार से लिंक हो)

📞 सहायता के लिए कहां संपर्क करें?



अगर आपकी किस्त नहीं आई है या कोई अन्य समस्या है, तो आप निम्न माध्यमों से संपर्क कर सकते हैं:

PM Kisan हेल्पलाइन: 155261 / 011-24300606

ईमेल: pmkisan-ict@gov.in

स्थानीय कृषि विभाग कार्यालय से भी जानकारी ली जा सकती है।

🌿 निष्कर्ष



PM-KISAN योजना भारत सरकार की सबसे सफल और किसान हितैषी योजनाओं में से एक बन चुकी है। इस योजना से हर साल करोड़ों किसानों को आर्थिक सहारा मिलता है, जिससे वे अपने कृषि कार्यों को बेहतर बना सकते हैं। 20वीं किस्त का जारी होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार किसानों की भलाई को सर्वोपरि मानती है।

क्या NSDL IPO CDSL को पीछे छोड़ सकता है? निवेश से पहले जानें ये 5 महत्वपूर्ण तथ्य!

क्या NSDL IPO CDSL को पीछे छोड़ सकता है? निवेश से पहले जानें ये 5 महत्वपूर्ण तथ्य!

भारत की प्रमुख डिपॉजिटरी कंपनी नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) का बहुप्रतीक्षित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) आज, 30 जुलाई 2025 को निवेशकों के लिए खुल गया है। यह ₹4,011 करोड़ का आईपीओ पूरी तरह से ऑफ़र फॉर सेल (OFS) है, जिसमें कुल 5.01 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की जा रही है।

इस आईपीओ को लेकर बाजार में खासा उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि NSDL भारत की पूंजी बाजार संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।

🔍 NSDL IPO की मुख्य जानकारियां


आईपीओ साइज: ₹4,011 करोड़

प्रकार: ऑफर फॉर सेल (OFS)

शेयरों की कुल संख्या: 5.01 करोड़

बोली लगाने की तिथि: 30 जुलाई से 1 अगस्त 2025 तक

फेस वैल्यू: ₹2 प्रति शेयर

प्राइस बैंड: जल्द घोषित होगा

लॉट साइज: निवेशक वर्ग के अनुसार तय


इस आईपीओ से कंपनी को सीधे कोई फंड प्राप्त नहीं होगा क्योंकि यह पूरी तरह से मौजूदा शेयरधारकों द्वारा की गई बिक्री है।

🏢 NSDL क्या है?


नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड की स्थापना 1996 में की गई थी और यह भारत की पहली और सबसे बड़ी डिपॉजिटरी कंपनी है। यह निवेशकों की प्रतिभूतियों जैसे कि शेयर, डिबेंचर, म्यूचुअल फंड आदि को इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुरक्षित रखती है।

इसका नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है और यह डिजिटल ट्रांजैक्शन, KYC सेवा, ई-वोटिंग और दस्तावेज़ सत्यापन जैसी सेवाएं प्रदान करता है।

मार्च 2025 तक NSDL के आँकड़े:

31 करोड़ से अधिक डिमैट खाते

₹450 लाख करोड़ से अधिक की प्रतिभूतियों का कस्टडी

280+ डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स के साथ साझेदारी

📈 अब IPO क्यों ला रही है NSDL?


NSDL लंबे समय से IPO लाने की योजना बना रही थी, और अब इसके लिए उपयुक्त समय माना जा रहा है:

1. SEBI की गाइडलाइंस के अनुसार, बाजार संरचना से जुड़ी संस्थाओं का सूचीबद्ध होना ज़रूरी है।


2. बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे डिपॉजिटरी सेवाओं की मांग भी बढ़ी है।


3. IPO बाजार में तेजी और निवेशकों की मजबूत रुचि

🧾 IPO में कौन-कौन शेयर बेच रहा है?


इस ऑफर फॉर सेल के तहत कंपनी के कई प्रमुख शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

IDBI बैंक

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)

एचडीएफसी बैंक

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

एक्सिस बैंक आदि


यह बिक्री मुख्यतः निवेश निकासी और विनियामक आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से की जा रही है।

💰 वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाएं


DRHP के अनुसार, एन एस डी एल ने बीते वर्षों में लगातार मजबूत राजस्व और लाभ अर्जित किया है। कंपनी की आय के प्रमुख स्रोत हैं:

इश्यूअर चार्ज

ट्रांजैक्शन फीस

KYC सेवाएं

डिजिटल सिग्नेचर और अन्य वैल्यू ऐडेड सेवाएं


FY2024 के अनुमानित आँकड़े:

राजस्व: ₹1,015 करोड़

शुद्ध लाभ: ₹315 करोड़

EBITDA मार्जिन: 55%+

ROE: लगभग 22%


डिजिटल निवेश और फिनटेक सेवाओं के बढ़ते चलन को देखते हुए, NSDL की सेवाओं की मांग आने वाले वर्षों में और भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

🧠 क्या आपको NSDL IPO में निवेश करना चाहिए?


निवेशक निम्नलिखित बातों पर विचार कर सकते हैं:

✅ मजबूत बाजार स्थिति: NSDL और CDSL का मिलाजुला वर्चस्व डिपॉजिटरी बाजार पर है।
✅ तेजी से बढ़ता डिमैट खाता आधार
✅ डिजिटल भारत अभियान से लाभ

❗चुनौतियाँ: यह IPO पूरी तरह से OFS है, यानी कोई नया फंड कंपनी को नहीं मिलेगा। साथ ही, तकनीकी या नियामक बदलाव जोखिम हो सकते हैं।

मध्यम से दीर्घकालिक नजरिए वाले निवेशकों के लिए यह एक स्थिर और भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।

🔄 NSDL बनाम CDSL: तुलना एक नज़र में


मापदंड NSDL || CDSL

स्थापना वर्ष 1996 || 1999
बाज़ार हिस्सेदारी ~58% || ~42%
सूचीबद्ध स्थिति 2025 में लिस्टिंग 2017 से सूचीबद्ध
सेवाएं डिमैट, KYC, ई-साइन आदि समान प्रकार की सेवाएं


जहाँ CDSL पहले ही बाजार में शानदार प्रदर्शन कर चुका है, NSDL की लिस्टिंग एक नई निवेश संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

निष्कर्ष


NSDL का IPO भारत की वित्तीय संरचना में एक बड़ा कदम है। यह कंपनी न केवल तकनीकी रूप से मजबूत है बल्कि भविष्य की डिजिटल फाइनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी एक बड़ा हिस्सा बने रहने की क्षमता रखती है।

यदि आप एक ऐसे स्टेबल और ग्रोथ-ओरिएंटेड सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं, तो NSDL IPO को गंभीरता से विचार किया जा सकता है—हालांकि निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।

₹1,300 करोड़ का Aditya infotech IPO पहले ही दिन हुआ पूरा सब्सक्राइब, रिटेल निवेशकों ने दिखाई जबरदस्त दिलचस्पी!

₹1,300 करोड़ का Aditya infotech IPO पहले ही दिन हुआ पूरा सब्सक्राइब, रिटेल निवेशकों ने दिखाई जबरदस्त दिलचस्पी!


देश की अग्रणी सीसीटीवी और सुरक्षा उत्पाद निर्माता कंपनी का Aditya infotech ipo (CP Plus ब्रांड के तहत) ₹1,300 करोड़ का पहले ही दिन यानी **29 जुलाई 2025** को पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। इस IPO को रिटेल निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिन्होंने अपने आवंटित हिस्से को **3.5 गुना से ज्यादा** सब्सक्राइब किया।

पहला दिन: सब्सक्रिप्शन का हाल


**रिटेल निवेशकों का दबदबा:** IPO के पहले दिन दोपहर तक रिटेल कटेगरी ने 3.5 गुना से लेकर 4.4 गुना तक आवेदन कर दिए। नॉन-इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) की ओर से 1.4x से 1.7x सब्सक्रिप्शन हुआ, जबकि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) की भागीदारी अभी तक केवल 1% ही रही।

**ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP):** ग्रे मार्केट में Aditya infotech IPO के प्रति काफी उत्साह देखा जा रहा है, जहां शेयर का प्रीमियम **₹240 से ₹263** तक चल रहा है। यह प्रीमियम ऊपरी प्राइस बैंड **₹675** के मुकाबले देखा गया है, जिससे लिस्टिंग के समय करीब **39% तक** का मुनाफा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

**एंकर निवेशकों से शानदार रिस्पॉन्स:** Aditya infotech IPO खुलने से पहले ही कंपनी ने **₹582 करोड़** जुटा लिए थे। इनमें नाम शामिल हैं – **Government of Singapore, Goldman Sachs, HDFC Mutual Fund**, और **Abu Dhabi Investment Authority** जैसे दिग्गज निवेशकों का।

✅ Aditya infotech IPO की मुख्य विशेषताएं


**कुल आकार:** ₹1,300 करोड़
अ – ₹500 करोड़ — नया इक्विटी इश्यू
ब – ₹800 करोड़ — प्रोमोटर की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS)

**प्राइस बैंड:** ₹640–₹675 प्रति शेयर
**लॉट साइज:** 22 शेयर (लगभग ₹14,850 न्यूनतम निवेश)
**बोली की अवधि:** 29 जुलाई से 31 जुलाई तक
**लिस्टिंग की संभावित तारीख:** 5 अगस्त 2025
**लीड मैनेजर:** ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल

📈 निवेशकों के लिए क्यों खास है यह IPO?


**बाजार में अग्रणी स्थिति:** CP Plus ब्रांड के तहत आदित्य इंफोटेक सिक्योरिटी और निगरानी उत्पादों में भारत की प्रमुख कंपनी है। इसके उत्पादों का उपयोग सरकारी से लेकर व्यक्तिगत व औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है।

**मजबूत वित्तीय प्रदर्शन:** कंपनी का मुनाफा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है और इसके पास खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल को समर्थन देती है।

**भविष्य की संभावनाएं:** भारत में सुरक्षा की मांग बढ़ रही है – खासकर शहरीकरण, स्मार्ट सिटी योजनाओं और संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर में निगरानी बढ़ने के कारण।

**इरादा साफ – कर्ज घटाना:** Aditya infotech IPO से जुटाई गई राशि का अधिकांश हिस्सा कंपनी अपने कर्ज को कम करने में लगाएगी, जिससे बैलेंस शीट मजबूत होगी और विकास के लिए अधिक संसाधन मिलेंगे।

👥 निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें


**मांग ज्यादा, शेयर सीमित:** रिटेल श्रेणी में 3.5x से ज्यादा की सब्सक्रिप्शन के चलते कई छोटे निवेशकों को आंशिक या शायद कोई अलॉटमेंट न मिले।

**मूल्यांकन पर नज़र:** बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनी की स्थिति मजबूत है, लेकिन कुछ चेतावनी दे रहे हैं कि मूल्यांकन (Valuation) थोड़ा ऊँचा हो सकता है।

**ब्रोकरेज की राय:** ज़्यादातर वित्तीय सलाहकारों ने ‘**लॉन्ग टर्म के लिए सब्सक्राइब करें**’ की सलाह दी है।

🧾 निष्कर्ष


Aditya infotech IPO दिन की शुरुआत में ही ओवरसब्सक्राइब होना भारतीय निवेशकों के बीच सुरक्षा तकनीकी कंपनियों के प्रति भरोसे को दर्शाता है। मजबूत वित्तीय स्थिति, बाजार में स्पष्ट लीडरशिप और उच्च GMP इस IPO को एक आकर्षक निवेश अवसर बना रहा है। 5 अगस्त को सूचीबद्ध होने से पहले यह IPO खुद ही एक सफल मुद्दा बन चुका है।

**निवेश से पहले, आवश्यक वित्तीय सलाह अवश्य लें।**

Anil Ambani की कारोबारी वापसी: रिलायंस पावर और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर फिर से निवेशकों की पसंद बन रहे हैं!

Anil Ambani की कारोबारी वापसी: रिलायंस पावर और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर फिर से निवेशकों की पसंद बन रहे हैं!


मुंबई – भारत के कॉर्पोरेट जगत में Anil Ambani की वापसी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। एक समय देश के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में शामिल रहे अंबानी की कारोबारी साम्राज्य को भारी कर्ज और लगातार डिफॉल्ट्स के कारण जबरदस्त झटका लगा था। लेकिन अब, उनकी दो प्रमुख कंपनियाँ – रिलायंस पावर और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर – फिर से बाजार में रफ्तार पकड़ती नजर आ रही हैं।

अंधकार से उजाले की ओर


Anil Ambani का नाम एक दौर में विश्व के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल था। लेकिन समय के साथ उनके व्यापारिक साम्राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया और परियोजनाओं में देरी, नियामकीय बाधाओं और रणनीतिक भूलों के चलते निवेशकों का भरोसा टूट गया।

विशेष रूप से 2020 के बाद, रिलायंस एडीए (अनिल धीरूभाई अंबानी) समूह संकट में घिरा नजर आया। शेयर की कीमतें गिर गईं, कर्जदाता दूर हो गए और बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई। मगर हाल के महीनों में कुछ सकारात्मक संकेत दिखने लगे हैं।

रिलायंस पावर में सुधार के संकेत


रिलायंस पावर ने अपने कामकाज में बड़े पैमाने पर सुधार किया है। कंपनी ने अपने गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों को बेचने, कर्ज चुकाने और परिचालन लागत को नियंत्रित करने जैसे कदम उठाए हैं। इसके चलते कंपनी की वित्तीय स्थिति में थोड़ी स्थिरता आई है।

इन सुधारों का असर निवेशकों के व्यवहार पर भी दिखने लगा है। लंबे समय से उपेक्षित रहे रिलायंस पावर के शेयर अब धीरे-धीरे निवेशकों को आकर्षित करने लगे हैं।

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की नई दिशा


रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर (RInfra) भी खुद को दोबारा स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। कंपनी ने अपने रोड और मेट्रो प्रोजेक्ट्स में रणनीतिक निवेश करते हुए नकदी प्रवाह को बेहतर करने के उपाय किए हैं।

कंपनी पुराने कानूनी मामलों को निपटाने, परियोजनाओं के समय पर निष्पादन और साझेदारी के नए अवसरों पर काम कर रही है, जिससे उसकी साख में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

निवेशकों की नजरें फिर से अंबानी पर


रिलायंस समूह की इस वापसी के पीछे न केवल कंपनी के आंतरिक सुधार हैं, बल्कि भारत की तेजी से बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर की भूमिका भी अहम रही है। सरकार की विभिन्न योजनाओं और निवेश बढ़ाने की नीति से इन कंपनियों को एक बार फिर मौका मिल रहा है।

हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह वापसी अभी भी नाजुक है। एक गलत कदम पूरी रणनीति को फिर से बिगाड़ सकता है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, “यह फीनिक्स जैसी वापसी है, पर अब भी सतर्क रहने की जरूरत है।”

आगे की राह


Anil Ambani पिछले कुछ वर्षों से सार्वजनिक रूप से बेहद शांत रहे हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में कंपनियों ने आंतरिक पुनर्गठन और फोकस्ड रणनीति के जरिए एक नया रास्ता चुना है। अगर यह यात्रा इसी दिशा में जारी रही, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे चर्चित वापसी बन सकती है।

लेकिन इसके लिए जरूरी है कि कंपनियाँ वित्तीय अनुशासन बनाए रखें, जोखिमपूर्ण विस्तार से बचें और नियामकीय ढांचे के साथ तालमेल बनाए रखें।

निष्कर्ष


Anil Ambani की कंपनियाँ आज भले ही अपने पूर्व गौरव से दूर हों, लेकिन उनकी हालिया कोशिशें यह दिखाती हैं कि सूझ-बूझ, अनुशासन और रणनीतिक बदलाव से फिर से विश्वास जीता जा सकता है। रिलायंस पावर और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की यह वापसी बताती है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो अंधेरे से भी रोशनी की ओर रास्ता निकलता है।

Eternal (zomato) q1 results, शेयरों में जबरदस्त उछाल, 14.9% की तेजी के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे!

Eternal (zomato) q1 results, शेयरों में जबरदस्त उछाल, 14.9% की तेजी के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे!


Eternal (zomato) q1 results, शेयरों में मंगलवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कंपनी के शेयरों ने शुरुआती कारोबार में ही ₹298.30 का अपर सर्किट छू लिया, जो कि 10% की बढ़त को दर्शाता है। इसके बाद भी तेजी जारी रही और शेयर बीएसई (BSE) पर ₹311.60 के रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंच गए, यानी कुल मिलाकर 14.9% की छलांग लगाई।

इस शानदार प्रदर्शन के पीछे मुख्य वजह कंपनी का हालिया ब्रांड परिवर्तन और भविष्य की व्यापक व्यापारिक रणनीति मानी जा रही है। जोमैटो का नाम बदलकर एटरनल लिमिटेड रखने के बाद से निवेशकों का भरोसा कंपनी पर और बढ़ा है।


🔍 प्रमुख बिंदु:


कंपनी का नाम: एटरनल लिमिटेड (पूर्व में जोमैटो)

तेजी की तारीख: मंगलवार, 22 जुलाई 2025

शुरुआती बढ़त: ₹298.30 पर 10% का उछाल

इंट्राडे हाई: ₹311.60, 14.9% की बढ़त

स्टॉक एक्सचेंज: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE)

📈 उछाल के संभावित कारण:


हालांकि कंपनी की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल बेहतर तिमाही नतीजों, ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार और ब्रांडिंग बदलाव से जुड़ी सकारात्मकता के चलते आया है।

Eternal (zomato) q1 results, के बाद अब कंपनी सिर्फ एक फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म नहीं रह गई है, बल्कि इसका उद्देश्य कंज़्यूमर इंटरनेट सेक्टर में विस्तार करना है। इसकी ब्लिंकिट जैसी सब्सिडियरी ने क्विक-कॉमर्स सेगमेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जो इसे अन्य प्रतिस्पर्धियों से अलग बनाता है।


💬 जानकारों की राय:


विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के शेयरों का वैल्यूएशन अब एक नई दिशा में बढ़ रहा है।

“एटरनल लिमिटेड को अब केवल फूड डिलीवरी स्टार्टअप नहीं, बल्कि एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जा रहा है,” एक म्यूचुअल फंड विश्लेषक ने कहा। “कंपनी की नई सोच और वित्तीय मजबूती के कारण निवेशक इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।”


🧾 निवेशकों के लिए संकेत:


तेजी के इस रुझान ने ट्रेडर्स और लॉन्ग टर्म निवेशकों के बीच कंपनी के प्रति रुचि बढ़ा दी है। ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी उल्लेखनीय इजाफा देखा गया है, जो बाजार में सकारात्मक भावनाओं का संकेत है।

अगर कंपनी अपनी रणनीतियों में निरंतरता बनाए रखती है तो यह शेयर आगे और ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। हालांकि, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञों की राय अवश्य लें।


अस्वीकरण:

यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी को निवेश सलाह के रूप में न लें। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


Anthem Biosciences IPO Allotment: आज घोषित होने जा रही है IPO आवंटन सूची, ऐसे चेक करें स्टेटस!

Anthem Biosciences IPO Allotment: आज घोषित होने जा रही है IPO आवंटन सूची, ऐसे चेक करें स्टेटस!


Anthem Biosciences IPO Allotment प्रक्रिया आज, 17 जुलाई 2025 को पूरी होने की संभावना है। निवेशकों में नए शेयरों के आवंटन को लेकर उत्सुकता चरम पर है क्योंकि इस पब्लिक इश्यू को जबर्दस्त प्रतिक्रिया मिली है। जानिए IPO की प्रमुख जानकारियां, आवंटन स्टेटस चेक करने के आसान तरीके और जरूरी लिंक!

Anthem Biosciences IPO: प्रमुख तथ्य


आईपीओ खुलने की तारीख: – 14 जुलाई 2025
आईपीओ बंद होने की तारीख: -16 जुलाई 2025
इश्यू साइज: – ₹3,395 करोड़
प्राइस बैंड: – ₹540 – ₹570 प्रति शेयर
लॉट साइज: – 26 शेयर प्रति लॉट
ओवरसब्सक्रिप्शन: – कुल सब्सक्रिप्शन लगभग 64–67 गुना
QIB: 183–193 गुना
NII: 42–45 गुना
रिटेल: लगभग 6 गुना
लिस्टिंग की तारीख: – 21 जुलाई 2025 (BSE & NSE)

कब आएगा IPO Allotment रिजल्ट?


इश्यू का आवंटन रिजल्ट आज 17 जुलाई को जारी होने का अनुमान है। जिन निवेशकों को शेयर अलॉट होंगे, उनके डिमैट खाते में 18 जुलाई तक शेयर क्रेडिट हो सकते हैं।

Anthem Biosciences IPO Allotment स्टेटस चेक करने के तरीके


1. KFin Technologies (रजिस्ट्रार) वेबसाइट पर

[KFinTech IPO Allotment Status](https://evault.kfintech.com/ipostatus/) पर जाएं।
“Anthem Biosciences IPO” सिलेक्ट करें।
पैन कार्ड नंबर, एप्लीकेशन नंबर, या DP/Client ID में से कोई भी विकल्प चुनें।

जरूरी डिटेल भरें और सबमिट करें।

2. BSE इंडिया वेबसाइट पर

[BSE IPO Allotment Status](https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx) पर जाएं।
“Equity” सिलेक्ट करें, इश्यू नेम में “Anthem Biosciences IPO” चुनें।
एप्लीकेशन नंबर या पैन एन्टर करें और “Search” पर क्लिक करें।

3. NSE इंडिया वेबसाइट पर

[NSE IPO Allotment Status](https://www.nseindia.com/products/dynaContent/equities/ipos/ipo_login.jsp) पर जाएं और मांगी गई जानकारी भरें।

महत्वपूर्ण तिथियाँ


| इवेंट | तारीख |
| IPO आवंटन फाइनल | 17 जुलाई 2025 |
| रिफंड इनिशिएट | 18 जुलाई 2025 |
| डिमैट खाता में शेयर क्रेडिट | 18 जुलाई 2025 |
| शेयर बाजार में सूचीबद्ध | 21 जुलाई 2025 |

आवंटन के बाद अगले कदम


अगर आपको शेयर अलॉट हुए हैं, तो वे 18 जुलाई तक डिमैट अकाउंट में दिखेंगे। जिन निवेशकों को अलॉटमेंट नहीं मिला, उनके रिफंड भी 18 जुलाई से शुरू हो सकते हैं। शेयरों की लिस्टिंग 21 जुलाई को बीएसई और एनएसई पर निर्धारित है, जिसके बाद ट्रेडिंग शुरू हो जाएगी।

ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) और लिस्टिंग


आईपीओ में भारी ओवरसब्सक्रिप्शन की वजह से प्री-लिस्टिंग ग्रे मार्केट में शेयरों का प्रीमियम प्राइस बैंड के ऊपर 25% तक देखा जा रहा है। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग परफॉर्मेंस बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

Anthem Biosciences: कंपनी परिचय


2006 में स्थापित इस कंपनी ने फार्मा और बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर में बेहतरीन रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज ऑफर कर वैश्विक पहचान बनाई है। कंपनी की मजबूत क्लाइंट बेस और विस्तार योजनाओं ने निवेशकों को आकर्षित किया है।

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PM kisan samman nidhi 20th installment जल्द होगी जारी, जानिए कौन हैं पात्र?

PM kisan samman nidhi 20th installment जल्द होगी जारी, जानिए कौन हैं पात्र?


देश के करोड़ों किसानों को आर्थिक सहारा देने वाली केंद्र सरकार की प्रमुख योजना PM kisan samman nidhi 20th installment जल्द ही किसानों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी।

दिसंबर 2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल ₹6,000 की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। अब जब अगली किस्त आने वाली है, तो यह जानना जरूरी है कि किन किसानों को इसका लाभ मिलेगा और कैसे पात्रता सुनिश्चित करें।

✅ PM kisan samman nidhi 20th installment: कब आएंगे पैसे?


कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 20वीं किस्त अगस्त 2025 में जारी होने की संभावना है। पिछली 19वीं किस्त में लगभग 8.5 करोड़ किसानों को ₹2,000 की राशि सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।

सरकार ने किसानों से आग्रह किया है कि वे समय रहते ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी कर लें और अपने भू-अभिलेख अपडेट करवा लें, ताकि भुगतान में कोई रुकावट न आए।

🧾 कौन-कौन हैं योजना के पात्र?


यदि आप पीएम-किसान योजना के तहत 20वीं किस्त का लाभ लेना चाहते हैं, तो आपको निम्नलिखित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा:

1. छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास अधिकतम 2 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि हो।


2. भू-अभिलेख अपडेट और आधार कार्ड से मेल खाते नाम होने चाहिए।


3. बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए और एनपीसीआई (NPCI) से सीडेड हो।


4. ई-केवाईसी अनिवार्य है — ऑनलाइन या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से की जा सकती है।

🚫 कौन नहीं हैं पात्र?


कुछ लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते, जैसे कि:

संस्थागत भूमि मालिक।

आयकर दाता।

डॉक्टर, इंजीनियर, वकील जैसे पेशेवर।

₹10,000 से अधिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी।

संवैधानिक पदों पर कार्य कर चुके व्यक्ति।

📲 20वीं किस्त की स्थिति कैसे जांचें?


आप अपनी किस्त की स्थिति इस प्रकार चेक कर सकते हैं:

🔗 वेबसाइट: https://pmkisan.gov.in

स्टेप्स:

1. वेबसाइट पर जाएं और ‘लाभार्थी स्थिति (Beneficiary Status)’ पर क्लिक करें।


2. आधार नंबर, बैंक खाता संख्या या मोबाइल नंबर दर्ज करें।


3. ‘Get Data’ पर क्लिक करके किस्त की जानकारी पाएं।

🧍 ई-केवाईसी कैसे करें?


20वीं किस्त प्राप्त करने के लिए ई-केवाईसी करना अनिवार्य है:

ऑनलाइन: OTP आधारित ई-केवाईसी pmkisan.gov.in पर करें।

ऑफलाइन: नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर बायोमेट्रिक ई-केवाईसी करवाएं।

📌 सुनिश्चित करें कि भुगतान समय पर मिले:


भू-अभिलेख में नाम सही होना चाहिए।

बैंक खाता सक्रिय और आधार से लिंक होना जरूरी है।

पोर्टल पर नियमित अपडेट देखते रहें।

📊 अब तक पीएम-किसान योजना का असर


इस योजना के तहत अब तक किसानों को कुल मिलाकर ₹3 लाख करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी और कृषि क्षेत्र में मजबूती आई है।

📣 निष्कर्ष


PM kisan samman nidhi 20th installment किसानों के लिए एक और आर्थिक राहत लेकर आएगी। यदि आप पात्र हैं, तो जल्द से जल्द ई-केवाईसी करवाएं, भू-अभिलेख अपडेट करें और पोर्टल पर अपनी स्थिति जांचते रहें। किसी भी जानकारी के लिए pmkisan.gov.in पर विजिट करते रहें।


बेंगलुरु में “No UPI, Only Cash” ट्रेंड क्यों कर रहा है वायरल? जानिए असली वजह!

बेंगलुरु में “No UPI, Only Cash” ट्रेंड क्यों कर रहा है वायरल? जानिए असली वजह!


भारत की टेक्नोलॉजी राजधानी कहे जाने वाले बेंगलुरु में एक हैरान करने वाला ट्रेंड सामने आया है। कई दुकानदारों और व्यापारियों ने सोशल मीडिया पर “No UPI, Only Cash” वाली पोस्ट की हैं जो कि बहुत वायरल हो रही हैं।

कई दुकानदार अब UPI या किसी भी डिजिटल भुगतान को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और ग्राहकों से केवल नकद लेन-देन की मांग कर रहे हैं। इस फैसले से शहर के डिजिटल-फ्रेंडली उपभोक्ताओं को काफी असुविधा हो रही है।

आखिर क्या है इसके पीछे की वजह?


इस बदलाव के पीछे कई प्रमुख कारण हैं जो छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान से दूर कर रहे हैं:

1. UPI पर बढ़ती अप्रत्यक्ष लागतें

हालांकि ग्राहकों के लिए UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त हैं, लेकिन व्यापारियों को कुछ मामलों में पेमेंट गेटवे चार्ज, सेटलमेंट डिले, या लिमिटेड सर्विसेस का सामना करना पड़ता है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि उन्हें भुगतान की पूरी राशि नहीं मिलती या उसमें देरी होती है।

2. टैक्स और कानूनी जटिलताएं

डिजिटल भुगतान से लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड बन जाता है, जिससे टैक्स विभाग की नजर में आना तय है। कई छोटे दुकानदार जो अब तक नकद में व्यापार कर टैक्स से बचते थे, अब डिजिटल भुगतान से अतिरिक्त कर बोझ और कॉम्प्लायंस का डर महसूस कर रहे हैं।

3. तकनीकी खराबियां और नेटवर्क समस्याएं

UPI आधारित भुगतान में कभी-कभी सर्वर फेलियर, नेटवर्क की समस्या, या लेन-देन की देरी भी आम हो गई है। दुकानदारों का कहना है कि ट्रांजैक्शन फेल होने पर ग्राहक असंतुष्ट हो जाते हैं और उन्हें नुकसान होता है।

4. नकद में तरलता (Liquidity) बेहतर

छोटे व्यापारी दिन-प्रतिदिन की खरीदारी, सप्लायर का भुगतान और अन्य खर्चों के लिए तुरंत नकद उपलब्धता को प्राथमिकता देते हैं। डिजिटल ट्रांजैक्शन की प्रक्रिया में समय लगता है, जिससे उनका कार्य प्रभावित होता है।

ग्राहकों की प्रतिक्रिया


युवा पीढ़ी और डिजिटल लेन-देन की आदती ग्राहक इस चलन से नाराज़ हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर ऐसे बोर्ड की तस्वीरें साझा की हैं, जिन पर लिखा है, “No UPI, Only Cash”। कुछ ग्राहक नकद लेकर आ रहे हैं, जबकि कुछ दुकानों से खरीदारी बंद कर चुके हैं।

शहर में आने वाले पर्यटक और नए लोग इस स्थिति से और भी अधिक असमंजस में हैं, क्योंकि भारत के बाकी हिस्सों में डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाया जा रहा है।

सरकार की डिजिटल इंडिया पहल को चुनौती


सरकार UPI और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने में अग्रणी रही है। भारत आज दुनिया में सबसे ज़्यादा रियल टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वाला देश बन चुका है। फिर भी, बेंगलुरु जैसे शहर में ये रुझान दिखाता है कि जमीनी स्तर पर अब भी समस्याएं बरकरार हैं।

आगे का रास्ता


जब तक सरकार व्यापारी वर्ग की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लेती — जैसे कि चार्जेस में कटौती, टैक्स में छूट, या सिस्टम को ज्यादा भरोसेमंद बनाना — तब तक नकद लेन-देन की ओर वापसी जारी रह सकती है।

फिलहाल, यदि आप बेंगलुरु में हैं, तो यह सुझाव दिया जा सकता है कि अपने वॉलेट में कुछ नकद ज़रूर रखें — क्योंकि हर दुकान डिजिटल नहीं है।