शुभमन गिल ने रचा इतिहास: एक टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज़ बने!

शुभमन गिल ने रचा इतिहास: एक टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज़ बने!


एडबस्टन टेस्ट 2025 में भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने दोहरा शतक और शतक की मदद से नया इतिहास रच दिया है। गिल ने दोनों पारियों में क्रमशः 269 और 161 रन बनाए और कुल 430 रन के साथ एक टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज़ बन गए हैं।

✅ शुभमन गिल की पहली पारी: रिकॉर्ड तोड़ 269 रन

पहली पारी में गिल ने क्लासिक टेस्ट बल्लेबाज़ी करते हुए 269 रन बनाए। यह किसी भी भारतीय कप्तान द्वारा टेस्ट क्रिकेट में बनाया गया सबसे बड़ा स्कोर है। इससे पहले यह रिकॉर्ड विराट कोहली (254)* के नाम था। गिल की इस पारी में तकनीक, संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखा।

✅ दूसरी पारी में भी तूफान: 161 रन की तेज पारी

दूसरी पारी में भी गिल ने अपने तेवर नहीं बदले। उन्होंने 162 गेंदों में 161 रन ठोक डाले और भारत को 427/6 तक पहुंचाया। इसके बाद टीम ने पारी घोषित कर इंग्लैंड के सामने 608 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य रखा।

📈 एक टेस्ट में 430 रन: गिल ने बनाया नया भारतीय रिकॉर्ड

शुभमन गिल का 430 रनों का यह योग न केवल सुनील गावस्कर (344) के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ता है, बल्कि वह अब ग्रहैम गूच (456 रन) के बाद किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा एक टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं।

⭐ क्या कहते हैं आंकड़े?

टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय कप्तान (गावस्कर और कोहली के बाद)

इंग्लैंड में किसी भारतीय द्वारा सबसे बड़ा स्कोर

एडबस्टन में किसी भी टीम द्वारा एक टेस्ट में 1000+ रन (भारत पहला)

2025 की टेस्ट सीरीज़ में अब तक सबसे ज्यादा रन (585 रन, 2 टेस्ट में)


🗣️ दिग्गजों की प्रतिक्रिया

पूर्व कप्तान विराट कोहली ने गिल की तारीफ करते हुए उन्हें “Star Boy” कहा। क्रिकेट जगत में इस पारी को टेस्ट क्रिकेट के गौरव की वापसी माना जा रहा है। गिल की बल्लेबाज़ी ने इंग्लैंड के ‘बाज़बॉल’ अटैक को बेअसर कर दिया।

📌 निष्कर्ष

शुभमन गिल की यह पारी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई है। कप्तानी के दबाव के बावजूद गिल ने न केवल टीम को मज़बूत स्थिति में पहुँचाया, बल्कि अपने करियर को भी नई ऊँचाई दी।


Disclaimer: इस ब्लॉग में दी गई सभी जानकारियाँ केवल सामान्य जानकारी और धार्मिक/सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी आध्यात्मिक या धार्मिक उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या ज्ञानी व्यक्ति से परामर्श अवश्य लें। इस लेख में दी गई जानकारी की पूर्णता, सटीकता या विश्वसनीयता की हम कोई गारंटी नहीं देते। इस ब्लॉग में उल्लिखित किसी भी जानकारी के उपयोग से उत्पन्न परिणामों की जिम्मेदारी लेखक या प्रकाशक की नहीं होगी।


टेस्ट क्रिकेट में सबसे बड़े 10 व्यक्तिगत स्कोर: इतिहास रचने वाली पारियां!

टेस्ट क्रिकेट में सबसे बड़े 10 व्यक्तिगत स्कोर: इतिहास रचने वाली पारियां!

टेस्ट क्रिकेट को क्रिकेट का सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रारूप माना जाता है। इसमें जब कोई बल्लेबाज़ विशाल स्कोर बनाता है, तो वह इतिहास के पन्नों में अमर हो जाता है। आइए जानते हैं टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में बनाए गए 10 सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर के बारे में:




1. ब्रायन लारा – 400 नाबाद (वेस्टइंडीज बनाम इंग्लैंड, 2004)

ब्रायन लारा ने 400 रन की नाबाद पारी खेलकर टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च स्कोर बनाया। एंटीगुआ में खेली गई इस पारी ने उन्हें फिर से विश्व रिकॉर्ड धारक बना दिया।




2. मैथ्यू हेडन – 380 (ऑस्ट्रेलिया बनाम ज़िम्बाब्वे, 2003)

हेडन ने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ पर्थ में 380 रनों की तूफानी पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 38 चौके और 11 छक्के लगाए।




3. ब्रायन लारा – 375 (वेस्टइंडीज बनाम इंग्लैंड, 1994)

लारा ने 2004 से पहले ही 1994 में इंग्लैंड के खिलाफ 375 रन बनाकर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया था। यह पारी भी एंटीगुआ में ही खेली गई थी।




4. महेला जयवर्धने – 374 (श्रीलंका बनाम दक्षिण अफ्रीका, 2006)

जयवर्धने ने कोलंबो में खेली गई इस ऐतिहासिक पारी में कुमार संगकारा के साथ मिलकर 624 रनों की विशाल साझेदारी की।




5. गैरी सोबर्स – 365 नाबाद (वेस्टइंडीज बनाम पाकिस्तान, 1958)

महज 21 साल की उम्र में गैरी सोबर्स ने कराची में 365 रनों की नाबाद पारी खेली थी। यह रिकॉर्ड 36 साल तक कायम रहा।




6. लेन हटन – 364 (इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया, 1938)

हटन ने ओवल मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 364 रनों की पारी खेलकर इंग्लैंड को 903/7 के विशाल स्कोर तक पहुंचाया।




7. सनथ जयसूर्या – 340 (श्रीलंका बनाम भारत, 1997)

जयसूर्या ने कोलंबो में भारत के खिलाफ 340 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी। इस पारी के दौरान श्रीलंका ने 952/6 रन बनाए, जो अब तक का सबसे बड़ा टेस्ट स्कोर है।




8. हनीफ मोहम्मद – 337 (पाकिस्तान बनाम वेस्टइंडीज, 1958)

हनीफ की 337 रनों की पारी क्रिकेट इतिहास की सबसे बेहतरीन डिफेंसिव पारियों में से एक मानी जाती है, जिसने पाकिस्तान को फॉलोऑन के बाद भी टेस्ट मैच बचाने में मदद की।




9. वॉली हैमंड – 336 नाबाद (इंग्लैंड बनाम न्यूज़ीलैंड, 1933)

हैमंड ने ऑकलैंड में 336 रनों की नाबाद पारी खेली, जिसमें उनका क्लास और तकनीक साफ दिखाई दी।




10. डेविड वॉर्नर – 335 नाबाद (ऑस्ट्रेलिया बनाम पाकिस्तान, 2019)

वॉर्नर ने एडिलेड में पाकिस्तान के खिलाफ 335 रनों की नाबाद पारी खेली थी। इस पारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने 589/3 पर पारी घोषित की।




निष्कर्ष

ये पारियां केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि धैर्य, साहस और प्रतिभा का प्रतीक हैं। इन खिलाड़ियों ने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित किया कि टेस्ट क्रिकेट में भी महानता हासिल की जा सकती है।

शुभमन गिल: भारतीय क्रिकेट का उभरता सितारा

शुभमन गिल: भारतीय क्रिकेट का उभरता सितारा


शुभमन गिल भारतीय क्रिकेट के सबसे होनहार युवा बल्लेबाज़ों में से एक माने जाते हैं। उनकी बल्लेबाज़ी में तकनीकी सटीकता, संतुलन और शांति देखने को मिलती है, जो उन्हें भविष्य का स्टार बनाती है। कई विशेषज्ञ उन्हें विराट कोहली और रोहित शर्मा के बाद भारतीय बल्लेबाज़ी की अगली बड़ी उम्मीद मानते हैं।

प्रारंभिक जीवन और घरेलू करियर

शुभमन गिल का जन्म 8 सितंबर 1999 को पंजाब के फाजिल्का जिले में हुआ था। उनके पिता ने बचपन से ही उनकी प्रतिभा को पहचाना और क्रिकेट की ओर प्रेरित किया। गिल ने बहुत ही कम उम्र में क्रिकेट की बारीकियों को समझना शुरू किया और आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया।

उनकी पहली बड़ी उपलब्धि 2018 अंडर-19 वर्ल्ड कप में सामने आई, जहां वे भारतीय टीम के उप-कप्तान थे। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 372 रन बनाए, जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में शानदार शतक भी शामिल था। इस प्रदर्शन के बाद उन्हें घरेलू क्रिकेट में तेजी से पहचान मिली।

रणजी ट्रॉफी में पंजाब की ओर से खेलते हुए उन्होंने तमिलनाडु के खिलाफ दोहरा शतक जमाया। इसके बाद उन्हें आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) की टीम ने चुना, जहां उन्होंने कई प्रभावशाली पारियां खेलीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम बनाया।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रवेश

शुभमन गिल ने जनवरी 2019 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। हालांकि, असली पहचान उन्हें 2020-21 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में मिली। इस श्रृंखला में भारत के कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल थे, तब गिल ने मौके का पूरा फायदा उठाया। गाबा टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने 91 रनों की यादगार पारी खेली और भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने में मदद की।

इसके बाद से गिल टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में टीम इंडिया का अहम हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने बांग्लादेश और न्यूज़ीलैंड के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए शतक और दोहरा शतक जमाया। उन्होंने वनडे में 200 रन बनाने वाले सबसे युवा भारतीयों में भी जगह बनाई।

आईपीएल और कप्तानी की भूमिका

आईपीएल में गिल का गुजरात टाइटन्स (GT) में स्थानांतरण उनके करियर के लिए निर्णायक रहा। आईपीएल 2023 में उन्होंने 800 से अधिक रन बनाए और ऑरेंज कैप जीती। इस सीज़न में उन्होंने तीन शतक भी लगाए। हार्दिक पंड्या के टीम से जाने के बाद उन्हें 2024 में GT का कप्तान नियुक्त किया गया। उनकी कप्तानी और रणनीतिक सोच की खूब सराहना हो रही है।

बल्लेबाज़ी शैली और भविष्य की उम्मीदें

गिल की बल्लेबाज़ी में पारंपरिक तकनीक और आधुनिक आक्रामकता का अनोखा संतुलन देखने को मिलता है। वे तेज़ गेंदबाज़ों और स्पिनरों दोनों के खिलाफ सहज हैं और हर प्रारूप में ढलने की क्षमता रखते हैं। उनके संयम और दबाव में खेलने की कला की तुलना अक्सर राहुल द्रविड़ से की जाती है।

भविष्य में गिल को भारतीय टीम का संभावित कप्तान माना जा रहा है। उनके पास समय, अनुभव और क्षमता तीनों हैं, जो उन्हें लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट का स्तंभ बना सकती है।

निष्कर्ष

शुभमन गिल आज के युवा भारतीय क्रिकेटरों का प्रतीक हैं – अनुशासित, प्रतिभाशाली और आत्मविश्वासी। पंजाब से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़े कारनामों की उम्मीद की जा रही है, और इसमें कोई शक नहीं कि उनका सर्वश्रेष्ठ अभी बाकी है।

आकाश दीप: भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ तेज गेंदबाज!

आकाश दीप: भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ तेज गेंदबाज!


आकाश दीप, बिहार से आने वाले एक युवा और प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज हैं, जिन्होंने हाल के वर्षों में भारतीय क्रिकेट जगत में अपनी एक खास पहचान बनाई है। अपनी रफ्तार, सटीकता और स्विंग कराने की क्षमता के दम पर उन्होंने क्रिकेट प्रेमियों और चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है। एक छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय टीम तक का उनका सफर मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास से भरा रहा है।

प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि

आकाश दीप का जन्म 15 दिसंबर 1996 को बिहार के डेहरी शहर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट में गहरी रुचि थी, लेकिन उनके क्षेत्र में खेल से जुड़ी सुविधाओं और अवसरों की भारी कमी थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

बेहतर प्रशिक्षण और अवसरों की तलाश में वे पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर चले गए, जहां उन्होंने स्थानीय क्लबों में खेलना शुरू किया। जल्द ही उनकी तेज गेंदबाजी और अनुशासित लाइन-लेंथ ने बंगाल के चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा, और उन्हें 2019 में बंगाल रणजी टीम में मौका मिला।

घरेलू क्रिकेट करियर

आकाश ने 2019-20 रणजी ट्रॉफी में बंगाल की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। उन्होंने शुरुआत से ही अपनी गेंदबाजी से प्रभाव छोड़ा और कई बार टीम को जीत दिलाई। उनकी स्विंग कराने की क्षमता और लगातार सही जगह गेंदबाजी करने का हुनर उन्हें एक भरोसेमंद गेंदबाज बनाता है।

वनडे और टी20 फॉर्मेट में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया, खासकर विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में। इन्हीं प्रदर्शनों के आधार पर उन्हें आईपीएल की टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) ने अपने साथ जोड़ा।

आईपीएल में अनुभव

2021 में आकाश दीप को आरसीबी ने अपनी टीम में शामिल किया। हालांकि पहले कुछ सीज़न में उन्हें खेलने का ज्यादा मौका नहीं मिला, लेकिन इस दौरान उन्हें विराट कोहली और मोहम्मद सिराज जैसे दिग्गजों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने और सीखने का अनुभव मिला। 2022 में उन्होंने कुछ मैच खेले और अपनी तेज गेंदबाजी से प्रभावित किया।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आगाज़

लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद आकाश दीप को आखिरकार भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने 2024 की शुरुआत में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। अपने पहले ही मैच में उन्होंने महत्वपूर्ण विकेट लेकर अपनी प्रतिभा साबित की और भारत को जीत दिलाने में योगदान दिया। उनकी रफ्तार और लंबी स्पेल फेंकने की क्षमता ने उन्हें एक संभावित स्टार के रूप में स्थापित किया।

गेंदबाजी की शैली और खूबियाँ

आकाश दीप गेंद को दोनों दिशाओं में स्विंग कराने की क्षमता रखते हैं। नई गेंद से खतरनाक स्विंग डालने के साथ-साथ वे डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर और बाउंसर भी फेंकते हैं। उनका अनुशासन, फिटनेस और दबाव में शांत रहना उन्हें खास बनाता है।

भविष्य की संभावनाएँ

भारतीय टीम लगातार नए और प्रभावशाली तेज गेंदबाजों की तलाश में रहती है, और आकाश दीप इस सूची में एक प्रमुख नाम बन चुके हैं। यदि वे इसी तरह मेहनत करते रहे और खुद को निखारते रहे, तो वे भविष्य में टीम इंडिया की गेंदबाजी की रीढ़ बन सकते हैं।

निष्कर्ष

बिहार के छोटे शहर से उठकर भारतीय टीम में जगह बनाना आकाश दीप की मेहनत और जुनून का प्रमाण है। उनका सफर देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। क्रिकेट की दुनिया में उनका भविष्य उज्जवल है, और आने वाले वर्षों में वे भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे बन सकते हैं।

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अमनजोत कौर: भारतीय महिला क्रिकेट की नई उभरती ताकत!

Amanjot kaur : Indian women’s cricketer





भारतीय महिला क्रिकेट को नई दिशा देने वाली खिलाड़ियों में अमनजोत कौर का नाम तेजी से उभर रहा है। वह एक शानदार ऑलराउंडर हैं, जो न सिर्फ बल्लेबाज़ी में धाक जमा रही हैं, बल्कि अपनी सधी हुई गेंदबाज़ी से भी अहम योगदान दे रही हैं। उनका खेल आत्मविश्वास और समर्पण का प्रतीक है।


प्रारंभिक जीवन और शुरुआत

अमनजोत कौर का जन्म 1 जनवरी 2000 को पंजाब के मोहाली शहर में हुआ। क्रिकेट के प्रति उनका झुकाव बचपन से ही था। उन्होंने अपने क्रिकेट सफर की शुरुआत स्कूल और क्लब स्तर से की। परिजनों के सहयोग और कड़ी मेहनत की बदौलत उन्होंने जल्दी ही घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई।

घरेलू स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन

अमनजोत ने पंजाब और चंडीगढ़ की महिला टीमों के लिए शानदार प्रदर्शन किया। सीनियर महिला टी20 और एकदिवसीय टूर्नामेंटों में उन्होंने अपने हरफनमौला खेल से प्रभावित किया। बल्लेबाज़ी में वह मिडिल ऑर्डर में आकर तेजी से रन बनाती हैं और गेंदबाज़ी में विरोधी टीम पर दबाव बनाना जानती हैं।

अंतरराष्ट्रीय पदार्पण और प्रभाव

जनवरी 2023 में अमनजोत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। डेब्यू मैच में उन्होंने मात्र 30 गेंदों पर नाबाद 41 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और भारत को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। इस प्रदर्शन ने उन्हें रातोंरात सुर्खियों में ला दिया।

इसके बाद उन्हें 2023 महिला टी20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि चयनकर्ता उनके टैलेंट पर भरोसा करते हैं और उन्हें भविष्य की स्टार के रूप में देख रहे हैं।

खेल की शैली

अमनजोत एक राइट-हैंड बैटर और मीडियम-पेस बॉलर हैं। वह टीम के लिए एक उपयोगी फिनिशर की भूमिका निभाती हैं। जब टीम को तेज रन चाहिए होते हैं, तब वह जिम्मेदारी से रन बनाकर दबाव से उबारती हैं। साथ ही उनकी गेंदबाज़ी में भी गहराई है, जिससे वे पारी के किसी भी हिस्से में गेंदबाज़ी कर सकती हैं।

विमेंस प्रीमियर लीग में कदम

2023 में शुरू हुई विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में अमनजोत को मुंबई इंडियंस ने अपनी टीम में शामिल किया। इस मंच पर उन्हें अनुभवी और विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास और खेल कौशल दोनों ही बढ़े हैं।

भविष्य की संभावनाएं

अमनजोत कौर भारतीय महिला क्रिकेट की आने वाली पीढ़ी का चेहरा बन सकती हैं। वह एक संतुलित ऑलराउंडर हैं जिनमें लंबे समय तक खेलने की क्षमता है। अगर उन्हें लगातार मौके और सही मार्गदर्शन मिलता रहा, तो वह टीम इंडिया की एक मजबूत स्तंभ बन सकती हैं।

निष्कर्ष

अमनजोत की कहानी एक ऐसी युवा खिलाड़ी की है जिसने अपने जुनून, परिश्रम और धैर्य से अपने सपनों को साकार किया। उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि आज भारतीय महिला क्रिकेट में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है — ज़रूरत है तो बस मौके और मंच की।


नितीश कुमार रेड्डी: भारत का उभरता हुआ ऑलराउंडर सितारा!

Nitish Kumar Reddy : Indian cricketer


भारत के युवा क्रिकेटरों में जिस नाम ने हाल ही में क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा है, वह है – नितीश कुमार रेड्डी। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से ताल्लुक रखने वाले इस होनहार ऑलराउंडर ने अपनी मेहनत, जज्बे और प्रतिभा के दम पर घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खुद को साबित किया है।




शुरुआती जीवन और संघर्ष

नितीश का जन्म 26 मई 2003 को हुआ था। बचपन में ही उन्हें क्रिकेट से प्रेम हो गया। पांच साल की उम्र से ही वे प्लास्टिक बैट से खेलना शुरू कर चुके थे। उनके पिता मुत्याला रेड्डी, जिन्होंने पहले हिंदुस्तान ज़िंक में नौकरी की थी, बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी स्थाई नौकरी छोड़ दी। यह फैसला परिवार के लिए आर्थिक रूप से कठिन साबित हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

नितीश की प्रतिभा को सबसे पहले पहचान मिली 2017-18 विजय मर्चेंट ट्रॉफी में, जब उन्होंने नागालैंड के खिलाफ दोहरा शतक जमाया और पूरे टूर्नामेंट में 1,237 रन बनाकर बीसीसीआई का सर्वश्रेष्ठ अंडर-16 क्रिकेटर अवॉर्ड जीता। यह उनकी मेहनत और समर्पण का पहला बड़ा इनाम था।




आईपीएल में शुरुआत और अंतरराष्ट्रीय पहचान

साल 2023 के आईपीएल ऑक्शन में सनराइजर्स हैदराबाद ने नितीश को बेस प्राइस ₹20 लाख में खरीदा। हालांकि, उस सीजन में उन्हें केवल दो मैच ही खेलने का मौका मिला। लेकिन 2024 में उन्होंने जोरदार वापसी की। उन्होंने पूरे सीजन में 303 रन बनाए और 3 विकेट भी लिए। इसके लिए उन्हें आईपीएल 2024 का एमर्जिंग प्लेयर अवॉर्ड भी मिला।

इसी साल अक्टूबर में बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेला। डेब्यू में ही उन्होंने 35 गेंदों पर 74 रन ठोक डाले और गेंद से 2 विकेट भी चटकाए। इस प्रदर्शन ने उन्हें मैन ऑफ द मैच का खिताब दिलाया।




टेस्ट क्रिकेट में ऐतिहासिक प्रदर्शन

2024-25 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न टेस्ट (बॉक्सिंग डे टेस्ट) में नितीश ने आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 189 गेंदों में 114 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली। यह पारी भारतीय टीम के लिए संकटमोचक बनी और आलोचकों को भी उनकी प्रतिभा माननी पड़ी।

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क ने उन्हें “जीनियस” करार दिया और बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजे जाने की सिफारिश की।




खेल शैली और विशेषताएँ

नितीश एक दाएं हाथ के मिडल ऑर्डर बल्लेबाज़ हैं जो साथ ही मीडियम पेस गेंदबाज़ी भी करते हैं। भारतीय क्रिकेट में ऐसे ऑलराउंडर्स की बेहद जरूरत रही है। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 61 विकेट और दो शतक दर्ज किए हैं। टी20, वनडे और टेस्ट – हर फॉर्मेट में वह संतुलित प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।




व्यक्तिगत जीवन और विनम्रता

नितीश की जीवन यात्रा केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। उनका परिवार, विशेषकर उनके पिता का संघर्ष, उन्हें मानसिक रूप से मज़बूत बनाता है। मेलबर्न शतक के बाद जब उनके परिवार ने सरप्राइज मुलाकात की, तो वह भावुक हो गए थे।
इसके बाद वे तिरुपति मंदिर गए और घुटनों के बल चढ़ाई करते हुए आभार व्यक्त किया – यह उनकी विनम्रता और श्रद्धा को दर्शाता है।




भविष्य की राह

सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें आईपीएल 2025 के लिए ₹6 करोड़ में रिटेन किया है। अब सबकी निगाहें इंग्लैंड दौरे पर हैं, जहां उनकी गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी दोनों की अग्निपरीक्षा होगी। अगर नितीश इसी तरह प्रदर्शन करते रहे, तो वे भारत के लिए एक भरोसेमंद तेज गेंदबाज़ी ऑलराउंडर बन सकते हैं।




निष्कर्ष

महज 22 साल की उम्र में नितीश कुमार रेड्डी ने जो मुकाम हासिल किया है, वह कई खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। प्रतिभा, मेहनत और विनम्रता के मेल से वे भारतीय क्रिकेट का भविष्य बन सकते हैं। आने वाले वर्षों में वे भारत के सबसे बहुमुखी क्रिकेटरों में गिने जा सकते हैं।