जैसलमेर में DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार!

जैसलमेर में DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार!

राजस्थान पुलिस ने जैसलमेर में DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर को ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया। संवेदनशील रक्षा डेटा लीक का खुलासा।

राजस्थान पुलिस की खुफिया शाखा ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (**DRDO**) के गेस्ट हाउस के प्रबंधक महेंद्र प्रसाद (कुछ रिपोर्टों में महेंद्र सिंह) को गिरफ्तार किया। यह गेस्ट हाउस जैसलमेर स्थित चांदन फील्ड फायरिंग रेंज के पास है, जहां संवेदनशील रक्षा परीक्षण होते हैं।

गिरफ्तारी से पहले उन्हें करीब एक हफ्ता हिरासत में रखकर सघन पूछताछ की गई थी। इस दौरान पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे ठोस सबूत मिले, जिन्होंने उनकी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी **ISI** से जासूसी में संलिप्तता की पुष्टि की। इसके बाद उन पर **ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923** के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामला कैसे उजागर हुआ


सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान पुलिस की CID (सुरक्षा) इकाई को निगरानी के दौरान यह आशंका हुई कि कोई अंदरूनी व्यक्ति DRDO से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लीक कर रहा है।

32 वर्षीय महेंद्र प्रसाद उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के पल्यून गांव के रहने वाले हैं और पिछले पांच साल से अनुबंध आधार पर गेस्ट हाउस का प्रबंधन कर रहे थे। इस पद के चलते उन्हें मेहमानों के रिकॉर्ड, उनकी गतिविधियों और आने-जाने की समयसारिणी तक सीधी पहुंच थी।

जासूसी का तरीका


जांच में पता चला कि महेंद्र प्रसाद ने DRDO वैज्ञानिकों, सेना के अधिकारियों और अन्य अहम मेहमानों की जानकारी सोशल मीडिया व एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से पाकिस्तान स्थित हैंडलरों तक पहुंचाई।
उनके मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में संवेदनशील डेटा, अतिथि सूची और प्रदेश व देश की सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारियों के साक्ष्य मिले, जो भारत की सामरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते थे।

DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई


पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त रूप से जांच करते हुए यह साक्ष्य जुटाए:
– एक हफ्ते की हिरासत में लगातार पूछताछ
– डिजिटल डिवाइस से जासूसी से जुड़े प्रमाण
– पाकिस्तान के साथ सीधा संपर्क स्थापित करने वाले चैट और कॉल रिकॉर्ड

इन साक्ष्यों के आधार पर महेंद्र प्रसाद को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर भेजा गया।

अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं


सीआईडी (सुरक्षा) के आईजी डॉ. विष्णुकांत ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया निगरानी को बढ़ाया गया था, जिसके चलते यह मामला उजागर हुआ। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा करार दिया।
सीमा से लगे राजस्थान के में पहले भी पाकिस्तान समर्थित जासूसी नेटवर्क पकड़े गए हैं, इसलिए यहां खुफिया एजेंसियां लगातार चौकन्नी रहती हैं।

व्यापक असर और आगे की रणनीति


इस मामले के बाद:
DRDO और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों में संविदा कर्मियों की पृष्ठभूमि जांच और सख्त की जाएगी।
– सभी हाई-सिक्योरिटी जोन्स में डिजिटल निगरानी और भी मजबूत की जाएगी।
– सुरक्षा में ‘इनसाइडर थ्रेट’ यानी अंदरूनी खतरे को रोकने के लिए नए प्रोटोकॉल लागू होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जासूसी लंबे समय तक चलती रही, तो इससे भारत के हथियार परीक्षण और मिसाइल परियोजनाओं की गुप्त जानकारी पड़ोसी देश के पास पहुंच सकती है।

निष्कर्ष


DRDO गेस्ट हाउस के मैनेजर महेंद्र प्रसाद की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह साबित किया है कि देश की सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि अंदरूनी तंत्र में भी सतर्कता पर निर्भर करती है।
यह घटना भविष्य में खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक केस स्टडी के रूप में देखी जाएगी, जो बताएगी कि तकनीक और मानव संसाधन दोनों की निगरानी कितनी जरूरी है।


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26 मासूमों की जान लेने वाले आतंकियों का खात्मा! Operation Mahadev की पूरी कहानी!

26 मासूमों की जान लेने वाले आतंकियों का खात्मा! Operation Mahadev की पूरी कहानी!


**सोमवार, 28 जुलाई 2025** को श्रीनगर से सटे **लिदवास** क्षेत्र में **“Operation Mahadev”** के तहत तीन आतंकियों को मार गिराया गया। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। यह संयुक्त अभियान भारतीय सेना की चिनार कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ द्वारा संचालित किया गया।

Operation Mahadev: मुठभेड़ का विवरण


सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी कि कुछ आतंकी लिदवास के घने जंगल में छिपे हुए हैं। इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया। खुद को घिरा देख आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी जिससे मौके पर तेज मुठभेड़ शुरू हो गई। कई घंटे की कार्रवाई के बाद तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद क्षेत्र को अच्छी तरह से सर्च किया गया ताकि कोई और आतंकी छिपा न हो।

मारे गए आतंकियों की पहचान


सूत्रों के अनुसार, मारे गए आतंकियों में से एक की पहचान **सुलेमान शाह** उर्फ **हाशिम मूसा** के रूप में हुई है। माना जा रहा है कि वह **22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले** का मुख्य साजिशकर्ता था। अन्य दो आतंकियों की पहचान **अबू हमज़ा** और **यासिर** के रूप में हुई है, जो इसी आतंकी गुट से जुड़े थे। कहा जा रहा है कि तीनों आतंकियों के संबंध लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से थे।

पहलगाम हमले से जुड़ाव की जांच



जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि क्या इन आतंकियों की सीधी संलिप्तता **22 अप्रैल को पहलगाम में हुए नरसंहार** में थी, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी। हमले के दौरान अधिकतर पीड़ित पर्यटक और धार्मिक अल्पसंख्यक थे जिन्हें पहचान कर निशाना बनाया गया था। इस घटना ने देशभर में हलचल मचा दी थी।

हालांकि हमले की जिम्मेदारी पहले **द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF)** ने ली थी — जो लश्कर का ही एक नकाबपोश संगठन माना जाता है — बाद में उन्होंने इनकार कर दिया। अब सुरक्षा बल जांच कर रहे हैं कि क्या सोमवार को मारे गए आतंकी ही उस हमले के योजनाकार और हमलावर थे।

बरामद हुए हथियार


मुठभेड़ के बाद तलाशी अभियान में **काफी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद** बरामद किया गया है, जिनमें **एके-सीरीज़ राइफलें, ग्रेनेड और संचार उपकरण** शामिल हैं। फॉरेंसिक टीमें इन सामग्रियों की जांच कर रही हैं ताकि आतंकी नेटवर्क के कामकाज और योजनाओं की जानकारी मिल सके।

रणनीतिक महत्व और सुरक्षा व्यवस्था


Operation Mahadev को सुरक्षा बलों के लिए एक **बड़ी रणनीतिक सफलता** माना जा रहा है, खासतौर पर ऐसे वक्त जब पास में **अमरनाथ यात्रा** भी चल रही है और भारी मात्रा में श्रद्धालु इलाके में मौजूद हैं। प्रशासन ने बताया कि क्षेत्र में गश्त और तलाशी जारी रहेगी।

हालांकि तीन प्रमुख आतंकियों के मारे जाने से बड़ा खतरा टल गया है, फिर भी सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी हैं।

निष्कर्ष


लिदवास में हुआ यह सफल अभियान भारत की आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता और नागरिकों को न्याय प्रदान करने की नीति को दर्शाता है। Operation Mahadev न सिर्फ तत्काल खतरे को खत्म करने में कामयाब रहा, बल्कि इससे पहलगाम हमले की गुत्थी सुलझाने में भी मदद मिल सकती है। घाटी में शांति बहाल रखने के लिए सुरक्षाबलों का अभियान आगे भी जारी रहेगा।

Indian Army Agniveer result 2025 जारी: रोल नंबर वाइज PDF @joinindianarmy.nic.in से करें डाउनलोड!

Indian Army Agniveer result 2025 जारी: रोल नंबर वाइज PDF @joinindianarmy.nic.in से करें डाउनलोड!


Indian Army ने अग्निवीर कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन (CEE) 2025 का रिजल्ट आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है। जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा में भाग लिया था, वे अब joinindianarmy.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट रोल नंबर के अनुसार पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं।

यह रिजल्ट विभिन्न श्रेणियों के लिए जारी किया गया है और उम्मीदवार अपने चयन की स्थिति रोल नंबर वाइज लिस्ट में देख सकते हैं।

🔍 मुख्य जानकारी – Indian Army agniveer CEE रिजल्ट 2025


रिजल्ट जारी होने की तारीख: 25 जुलाई 2025

परीक्षा का नाम: अग्निवीर कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन (CEE) 2025

आयोजक संस्था: Indian Army

रिजल्ट का प्रारूप: पीडीएफ (ऑनलाइन)

आधिकारिक वेबसाइट: joinindianarmy.nic.in

रिजल्ट फॉर्मेट: रोल नंबर के अनुसार

📂 किन श्रेणियों के लिए जारी हुआ रिजल्ट?


Indian Army ने अग्निवीर भर्ती परीक्षा 2025 के तहत निम्नलिखित पदों के लिए परिणाम जारी किया है:

अग्निवीर (जनरल ड्यूटी)

अग्निवीर (टेक्निकल)

अग्निवीर क्लर्क / स्टोर कीपर टेक्निकल

अग्निवीर ट्रेड्समैन (10वीं और 8वीं पास)


उम्मीदवार संबंधित कैटेगरी के अनुसार पीडीएफ फाइल में अपना रोल नंबर खोज सकते हैं।

📥 कैसे करें अग्निवीर CEE रिजल्ट 2025 डाउनलोड?


निम्नलिखित चरणों का पालन करके आप अपना रिजल्ट आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं:

1. आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं:
joinindianarmy.nic.in खोलें।


2. CEE रिजल्ट सेक्शन देखें:
होमपेज पर दिए गए “CEE Result 2025” लिंक पर क्लिक करें।


3. अपनी कैटेगरी और जोन चुनें:
उस क्षेत्र और पद का चयन करें जिसके लिए आपने आवेदन किया था।


4. रिजल्ट PDF डाउनलोड करें:
संबंधित लिंक पर क्लिक कर PDF फाइल डाउनलोड करें।


5. रोल नंबर से खोजें:
PDF खोलने के बाद Ctrl+F दबाकर अपना रोल नंबर सर्च करें।

🧾 अगला चरण: चयनित उम्मीदवारों के लिए क्या है आगे?


CEE परीक्षा में पास होने वाले अभ्यर्थियों को अब आगे की चयन प्रक्रिया में भाग लेना होगा, जिसमें शामिल हैं:

दस्तावेज़ सत्यापन

शारीरिक दक्षता परीक्षण (यदि लागू हो)

चिकित्सीय परीक्षण

अंतिम मेरिट सूची और भर्ती प्रक्रिया


Indian Army की वेबसाइट पर भविष्य की तिथियों और सूचनाओं के लिए नियमित रूप से नजर बनाए रखें।

🗓️ महत्वपूर्ण तिथियाँ (संभावित)


कार्यक्रम तिथि

CEE परीक्षा अप्रैल–मई 2025
रिजल्ट जारी 25 जुलाई 2025
दस्तावेज़ सत्यापन अगस्त 2025
मेडिकल परीक्षण अगस्त–सितंबर 2025

⚠️ उम्मीदवारों के लिए जरूरी चेतावनी


Indian Army ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी दलाल या एजेंट की कोई भूमिका नहीं है। उम्मीदवार केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही जानकारी प्राप्त करें और किसी भी तरह की धोखाधड़ी से सतर्क रहें।

📞 संपर्क जानकारी


अगर किसी उम्मीदवार को रिजल्ट देखने में कोई समस्या आ रही है, तो वह joinindianarmy.nic.in पर दिए गए क्षेत्रीय हेल्पलाइन नंबरों की मदद ले सकता है।

✅ निष्कर्ष


अग्निवीर CEE रिजल्ट 2025 का ऐलान Indian Army के भर्ती अभियान में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। जिन अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की है, उन्हें आगामी चरणों के लिए तैयार रहना चाहिए और सभी दस्तावेज़ों को समय से पहले व्यवस्थित कर लेना चाहिए।

Join Indian Army: अग्निवीर रिजल्ट 2025 जल्द होगा जारी, यहां जानें पूरी प्रक्रिया!

Join Indian Army: अग्निवीर रिजल्ट 2025 जल्द होगा जारी, यहां जानें पूरी प्रक्रिया!


भारतीय सेना में शामिल होने का सपना देख रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। Join Indian Army Agniveer Result 2025 जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार, अग्निवीर भर्ती परीक्षा का परिणाम जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त 2025 के पहले सप्ताह तक घोषित किया जा सकता है।

जो उम्मीदवार इस साल Common Entrance Exam (CEE) में शामिल हुए थे, वे जल्द ही join indian army की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाकर अपना परिणाम देख सकेंगे।


🔍 Join Indian Army Agniveer Result 2025 की मुख्य बातें


परीक्षा का नाम: अग्निवीर कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE)

रिजल्ट जारी होने की संभावित तारीख: जुलाई 2025 का अंतिम सप्ताह या अगस्त का पहला सप्ताह

रिजल्ट प्लेटफॉर्म: joinindianarmy.nic.in

उपलब्ध दस्तावेज: रिजल्ट और प्रोविजनल आंसर की

📥 ज्वाइन Indian Army Result 2025 ऐसे करें डाउनलोड


1. सबसे पहले joinindianarmy.nic.in वेबसाइट पर जाएं।


2. “ज्वाइन Indian Army Agniveer Result 2025” लिंक को खोजें और उस पर क्लिक करें।


3. अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, पासवर्ड या डेट ऑफ बर्थ दर्ज करें।


4. लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर रिजल्ट दिखेगा।


5. रिजल्ट को PDF में डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंट आउट निकाल लें।

📌 प्रोविजनल आंसर की की सुविधा


Join Indian Army की ओर से CEE परीक्षा की प्रोविजनल उत्तर कुंजी भी जारी की जाएगी, जिससे उम्मीदवार अपने उत्तरों का मिलान कर सकते हैं। अगर कोई उत्तर गलत लगे तो वे आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।


🏃 Join Indian Army अग्निवीर चयन प्रक्रिया


CEE में सफल अभ्यर्थियों को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा जिसमें शामिल हैं:

शारीरिक दक्षता परीक्षण (Physical Fitness Test)

चिकित्सा परीक्षण (Medical Examination)


इन सभी चरणों को पास करने के बाद ही उम्मीदवारों का चयन अंतिम मेरिट सूची में किया जाएगा।

✅ Join Indian Army से जुड़ी जरूरी सलाह


केवल आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in से ही जानकारी प्राप्त करें।

समय-समय पर वेबसाइट चेक करते रहें ताकि किसी भी अपडेट से चूक न हो।

लॉगिन डिटेल्स पहले से तैयार रखें और रिजल्ट घोषित होने के बाद तुरंत जांच करें।

📢 निष्कर्ष


यदि आप Join Indian Army के माध्यम से देश सेवा का अवसर तलाश रहे हैं, तो अग्निवीर परिणाम 2025 आपके लिए अगला बड़ा कदम है। रिजल्ट जारी होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी तैयारी जारी रखें और आगे की चयन प्रक्रिया के लिए तैयार रहें।


भारत ने लॉन्च की स्वदेशी ATAGS तोप, कुछ ही सेकंड में पाकिस्तान तक कर सकती है हमला!

भारत ने लॉन्च की स्वदेशी ATAGS तोप, कुछ ही सेकंड में पाकिस्तान तक कर सकती है हमला!


आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए भारत ने अपनी अत्याधुनिक स्वदेशी तोप प्रणाली एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) का सफलतापूर्वक अनावरण किया है। यह शक्तिशाली तोप प्रणाली रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई है, जिसमें भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स जैसी प्रमुख निजी कंपनियों का भी अहम योगदान रहा है।

कुछ ही सेकंड में दुश्मन पर सटीक वार


ATAGS की सबसे बड़ी खासियत इसकी दूर तक मार करने की क्षमता है। यह तोप पाकिस्तान की सीमा के अंदर तक स्थित लक्ष्यों को कुछ ही सेकंड में सटीकता से निशाना बना सकती है। इसका अधिकतम मारक दायरा लगभग 48 किलोमीटर है, जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली टोएड आर्टिलरी गन में शामिल करता है।

उन्नत तकनीक से लैस


ATAGS में कई अत्याधुनिक तकनीकी खूबियाँ शामिल हैं:

155 मिमी, 52-कैलिबर बैरल

स्वचालित गोला-बारूद हैंडलिंग सिस्टम

इलेक्ट्रो-मेकैनिकल नियंत्रण प्रणाली जो सटीकता बढ़ाती है।

सभी प्रकार की जमीन पर चलने की क्षमता


यह तोप 60 सेकंड में 5 गोले दाग सकती है और इसकी सतत फायरिंग क्षमता 60 राउंड प्रति घंटा है, जो इसे एक असाधारण युद्धक प्रणाली बनाती है।

पूरी तरह स्वदेशी निर्माण


ATAGS भारत की रक्षा निर्माण क्षमता का बेहतरीन उदाहरण है। यह प्रणाली लगभग 80% तक स्वदेशी रूप से विकसित की गई है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को मजबूती देती है।

इस तोप का परीक्षण भारत के विभिन्न मौसमों और भौगोलिक परिस्थितियों में किया गया, जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों और रेगिस्तानी इलाकों में। हर बार यह प्रणाली उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन करने में सफल रही।

सामरिक दृष्टिकोण से अहम


ATAGS के सेना में शामिल होने से भारत की तोपखाना रेजीमेंट की ताकत में जबरदस्त इजाफा होगा, खासकर पाकिस्तान के साथ लगती पश्चिमी सीमा पर। इसकी लंबी रेंज, तेज तैनाती और सटीक निशाना लगाने की क्षमता इसे सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए बेहद उपयुक्त बनाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तोप प्रणाली भारत की प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करेगी और दुश्मनों के लिए एक सख्त संदेश होगी।

आगे की योजनाएं


रक्षा मंत्रालय द्वारा इस प्रणाली की पहली खेप के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है। आने वाले वर्षों में 300 से अधिक ATAGS तोपों को भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा, जिससे पुरानी बोफोर्स और अन्य आयातित तोपों को धीरे-धीरे बदला जाएगा।

भारत भविष्य में इस उन्नत प्रणाली का अन्य मित्र देशों को निर्यात करने की भी योजना बना रहा है, जिससे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को बल मिलेगा।


निष्कर्ष:


ATAGS का सफल अनावरण भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह न केवल देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि भारत को वैश्विक सैन्य तकनीक में एक नई पहचान भी दिलाता है। यह कदम आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की ओर एक बड़ा और गर्वपूर्ण प्रयास है।

Shubhanshu Shukla की वापसी को राष्ट्रपति ने बताया ‘भारत के लिए मील का पत्थर’

Shubhanshu Shukla की वापसी को राष्ट्रपति ने बताया ‘भारत के लिए मील का पत्थर’


भारत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण के रूप में, देश के जाने-माने वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ Shubhanshu Shukla की भारत वापसी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने “भारत के लिए मील का पत्थर” करार दिया है। इस खबर के सामने आते ही देशभर में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ गई है। राजनेताओं से लेकर आम नागरिकों तक सभी ने इस वापसी का स्वागत करते हुए इसे भारत के विकास पथ में एक अहम मोड़ बताया है।

कौन हैं Shubhanshu Shukla?


शुभांशु शुक्ला एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं, जो पिछले कुछ वर्षों से विदेशों में रहकर उच्चस्तरीय तकनीकी और अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य कर रहे थे। उनकी विशेषज्ञता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा तकनीक, और नवाचार जैसे क्षेत्रों में मानी जाती है। अब उनके भारत लौटने से देश को तकनीकी क्षेत्र में नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद की जा रही है।

राष्ट्रपति मुर्मू का बयान


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने आधिकारिक बयान में कहा,
Shubhanshu Shukla की वापसी केवल एक व्यक्ति की घर वापसी नहीं है, बल्कि यह भारत की प्रगति में एक ऐतिहासिक कदम है। उनका दृष्टिकोण भारत को वैश्विक नवाचार और तकनीक का नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब अवसरों की भूमि बन चुका है, और यह वापसी दर्शाती है कि अब विश्वभर में बसे भारतीयों को अपने देश की संभावनाओं पर विश्वास है।

सरकार और जनता की प्रतिक्रियाएं


प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी Shubhanshu Shukla की वापसी का स्वागत करते हुए उनके निर्णय को सराहा है।
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ट्वीट कर लिखा:
“शुभांशु शुक्ला का भारत में स्वागत है। आपकी प्रतिभा भारत की तकनीकी प्रगति में प्रेरणा बनेगी। यह देश में ‘ब्रेन गेन’ की शुरुआत का प्रतीक है।”

सामाजिक मीडिया पर भी लोगों ने शुक्ला की वापसी का जोरदार स्वागत किया। विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और युवा वर्ग ने इसे प्रेरणादायक कदम बताया।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?


भारत लंबे समय से “ब्रेन ड्रेन” यानी प्रतिभाशाली लोगों के विदेश पलायन की समस्या से जूझता रहा है। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। अब कई भारतीय विशेषज्ञ और वैज्ञानिक वापस लौट रहे हैं ताकि अपने देश में बदलाव ला सकें। शुभांशु शुक्ला की वापसी इसी सकारात्मक बदलाव का उदाहरण है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि उनकी वापसी से अन्य भारतीय पेशेवरों को भी अपने देश लौटने की प्रेरणा मिलेगी।

आगे क्या?


हालांकि शुक्ला ने अभी अपने भविष्य की योजनाओं की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वह सरकार की डिजिटल परियोजनाओं, रक्षा अनुसंधान या कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में योगदान दे सकते हैं। जल्द ही उनकी भूमिका को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आ सकती है।

निष्कर्ष:


Shubhanshu Shukla की भारत वापसी केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह उस नए भारत की पहचान है जो वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। राष्ट्रपति से लेकर आम नागरिकों तक, सभी इसे भारत के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

‘सिंदूर ऑपरेशन’ पर एरिक ट्रैपियर के बयान से जुड़ी खबरों का Dassault aviation ने खंडन किया!

‘सिंदूर ऑपरेशन’ पर एरिक ट्रैपियर के बयान से जुड़ी खबरों का Dassault aviation ने खंडन किया!


फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी Dassault aviation ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का सख्ती से खंडन किया है, जिनमें कंपनी के चेयरमैन और सीईओ एरिक ट्रैपियर के हवाले से ‘सिंदूर ऑपरेशन’ में राफेल लड़ाकू विमानों की भूमिका को लेकर कथित बयान दिए जाने का दावा किया गया था।

Dassault aviation द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया:


“कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में Dassault aviation के चेयरमैन और सीईओ एरिक ट्रैपियर के हवाले से सिंदूर ऑपरेशन को लेकर जो टिप्पणियां की गई हैं, उन्हें डसॉल्ट एविएशन औपचारिक रूप से खारिज करता है। एरिक ट्रैपियर द्वारा इस ऑपरेशन में राफेल के उपयोग को लेकर कोई तकनीकी या परिचालन संबंधी टिप्पणी नहीं की गई है,” यह कंपनी की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया।

क्या है सिंदूर ऑपरेशन?


सिंदूर ऑपरेशन को लेकर आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह भारत की सशस्त्र सेनाओं द्वारा हाल के सुरक्षा हालातों के जवाब में की गई एक महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई थी। इस ऑपरेशन में राफेल जेट्स के इस्तेमाल को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, जिससे मीडिया की रुचि और भी बढ़ गई थी।

भारत की रक्षा प्रणाली में राफेल की भूमिका


Dassault aviation द्वारा निर्मित राफेल फाइटर जेट्स भारत की वायुसेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाते हैं। अपनी मल्टी-रोल क्षमताओं, उच्च सटीकता और तेज प्रतिक्रिया क्षमता के लिए प्रसिद्ध राफेल विमानों को भारत ने हाल ही में अपने बेड़े में शामिल किया था।

हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी सैन्य ऑपरेशन से जुड़ी गोपनीय जानकारी पर टिप्पणी नहीं करती, और न ही किसी भी देश के संचालन मामलों में हस्तक्षेप करती है।

मीडिया रिपोर्टिंग और कंपनी का रुख


डसॉल्ट एविएशन की यह तत्काल प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि रक्षा मामलों से जुड़ी रिपोर्टिंग में सटीकता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है। किसी भी शीर्ष अधिकारी के कथित बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत करना भ्रामक सूचनाओं को जन्म दे सकता है।

कंपनी ने यह भी दोहराया कि वह भारत के साथ अपने दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को लेकर प्रतिबद्ध है और राष्ट्रीय रक्षा निर्णयों की संप्रभुता और गोपनीयता का सम्मान करती है।


मुख्य बिंदु:


डसॉल्ट एविएशन ने ‘सिंदूर ऑपरेशन’ को लेकर एरिक ट्रैपियर के बयान का स्पष्ट खंडन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स में उद्धृत टिप्पणियां गलत और भ्रामक बताई गईं।

राफेल भारत की रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा है।

कंपनी सैन्य संचालन पर टिप्पणी नहीं करती और संप्रभु राष्ट्रों के अधिकारों का सम्मान करती है।


इस आधिकारिक बयान के ज़रिए डसॉल्ट एविएशन ने गलत सूचनाओं पर रोक लगाने और स्थिति की स्पष्टता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

डीआरडीओ ने पेश किया स्वदेशी माउंटेड गन सिस्टम, सेना की ताकत में होगा जबरदस्त इजाफा!

डीआरडीओ ने पेश किया स्वदेशी माउंटेड गन सिस्टम, सेना की ताकत में होगा जबरदस्त इजाफा!


रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने सोमवार को पुणे में अपनी नई उपलब्धि, स्वदेशी माउंटेड गन सिस्टम (MGS) का सफल प्रदर्शन किया। यह उन्नत ट्रक-माउंटेड तोप प्रणाली न केवल उच्च मारक क्षमता रखती है, बल्कि आधुनिक युद्ध के परिदृश्य में सेना को तेज और सुरक्षित जवाबी हमला करने में भी सक्षम बनाएगी।

यह स्वदेशी तोपखाना प्रणाली DRDO के नेतृत्व में देश की रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs), अग्रणी निजी कंपनियों और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित की गई है। भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स जैसे उद्योग इस परियोजना के प्रमुख भागीदार हैं।

आधुनिक तकनीक और युद्धक्षमता


एमजीएस को विशेष रूप से रेगिस्तानी इलाकों और दुर्गम पहाड़ों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह प्रणाली 155 मिमी/52 कैलिबर की तोप से लैस है, जो प्रति मिनट छह राउंड तक फायर कर सकती है। इसका निर्माण उन्नत टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) से प्रेरित है। इसमें ऑटोमैटिक गन अलाइनमेंट, इंटीग्रेटेड फायर कंट्रोल सिस्टम और 24 प्रोजेक्टाइल की ऑटोमैटिक एम्युनिशन मैनेजमेंट शामिल है।

एमजीएस को BEML द्वारा निर्मित टाट्रा 8×8 वाहन पर लगाया गया है, जो 80 किमी/घंटा तक की रफ्तार से सड़क पर और 40 किमी/घंटा तक उबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकता है। सात सदस्यीय चालक दल को बख्तरबंद केबिन में पूर्ण सुरक्षा मिलती है।

सटीकता और तेज तैनाती


यह माउंटेड गन सिस्टम 45 किमी तक की दूरी तक सटीकता से लक्ष्य भेद सकता है और महज 85 सेकंड में स्थान बदल सकता है, जिससे यह दुश्मन के पलटवार से बच सकता है। पोकरण और बालासोर में इसके 100 से अधिक फायरिंग परीक्षण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।

लागत में भी प्रभावी


‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत तैयार यह प्रणाली विदेशी विकल्पों की तुलना में काफी सस्ती है। जहां आयातित विकल्पों की कीमत करीब ₹40 करोड़ होती है, वहीं एमजीएस की अनुमानित लागत मात्र ₹15 करोड़ है। भारतीय सेना 700 से 800 यूनिट शामिल करने की योजना बना रही है, जिसमें भारत फोर्ज प्रमुख निर्माण साझेदार होगा।

वैश्विक मानकों की बराबरी


एमजीएस, फ्रांस की सीज़र और इज़राइल की एटीएमओएस जैसी वैश्विक तोप प्रणालियों के समकक्ष है। अहमदनगर के वाहन अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (VRDE) में इसका सफल प्रदर्शन आधुनिक युद्ध में भारत की आत्मनिर्भरता को नया आयाम देगा।



पाकिस्तान में घातक आत्मघाती विस्फोट में 13 सैनिकों की मौत: AFP”

पाक सेना के काफिले पर आत्मघाती हमला, 13 की मौत”

पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में एक आत्मघाती हमले में 13 सैनिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने शनिवार को इस घटना की पुष्टि की। यह आत्मघाती हमला खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तर वज़ीरिस्तान ज़िले में हुआ, जो अफगानिस्तान की सीमा के निकट स्थित है।

मीडिया एजेंसी एएफपी के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरे वाहन को सेना के काफिले से टकरा दिया। टक्कर के साथ ही एक जबरदस्त धमाका हुआ, जिसमें कई सैन्य वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और आसपास के क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ।

उत्तर वज़ीरिस्तान पहले भी आतंकवादी गतिविधियों का गढ़ रहा है। अफगान सीमा से सटे होने के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से विभिन्न उग्रवादी समूहों की गतिविधियों का केंद्र रहा है। पाकिस्तान की सेना ने यहां कई बार बड़े स्तर पर आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए हैं, लेकिन आतंकी हमलों की घटनाएं पूरी तरह थमी नहीं हैं।

हमले के तुरंत बाद सुरक्षाबलों और बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। घायलों को नज़दीकी सैन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। सुरक्षा बलों ने इलाके को सील कर दिया है और जांच शुरू कर दी गई है।

हालांकि अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे वही कट्टरपंथी संगठन हो सकते हैं जो इस क्षेत्र में पहले भी हमले कर चुके हैं। बीते कुछ महीनों में पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में सुरक्षा बलों पर हमलों की संख्या में वृद्धि देखी गई है।

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इस नृशंस हमले की कड़ी निंदा की है और शहीद हुए सैनिकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा, “हमारे बहादुर जवानों की कुर्बानियां व्यर्थ नहीं जाएंगी। आतंकवाद के खिलाफ हमारी जंग जारी रहेगी और ऐसे कायराना हमले हमारे हौसले को नहीं तोड़ सकते।”

पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आतंकवाद के खात्मे तक अभियान जारी रहेंगे। सेना ने दोहराया कि देश में स्थायित्व और शांति की स्थापना के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि पाकिस्तान को अब भी चरमपंथी ताक़तों से गंभीर खतरा बना हुआ है। देश की सुरक्षा के लिए सेना के जवान लगातार अपनी जान की बाज़ी लगा रहे हैं, और उनका बलिदान देश की सुरक्षा और शांति के लिए प्रेरणा है।