सोहम पारेख विवाद के बाद मिली नई राह – एआई स्टार्टअप ने दिया दूसरा मौका!

सोहम पारेख विवाद के बाद मिली नई राह – एआई स्टार्टअप ने दिया दूसरा मौका

भारतीय टेक प्रोफेशनल सोहम पारेख, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर एक विवाद के केंद्र में रहे, अब उन्हें एक नई शुरुआत का मौका मिला है। अमेरिका स्थित एक स्टार्टअप के संस्थापक द्वारा उन पर एक साथ कई कंपनियों में काम करने का आरोप लगाया गया था, जिससे सोशल मीडिया पर नैतिकता और वर्क कल्चर को लेकर बहस छिड़ गई थी। लेकिन इसी विवाद के बीच एक एआई स्टार्टअप ने उन्हें दूसरी पारी खेलने का अवसर दिया है।

सोहम पर आरोप था कि वे एक ही समय में कई कंपनियों में फुल-टाइम नौकरी कर रहे थे, जिसके चलते उनके प्रोफेशनल आचरण पर सवाल खड़े हुए। हालांकि, कई लोगों ने यह भी कहा कि मौजूदा आर्थिक अनिश्चितता और वर्क फ्रॉम होम कल्चर में कुछ कर्मचारी अतिरिक्त आय के लिए ऐसा कदम उठा रहे हैं।

इस पूरे विवाद के बीच एक सकारात्मक मोड़ तब आया जब एआई स्टार्टअप HyperSpell के फाउंडर कोनर ब्रेनन-बर्क ने सोहम को नौकरी का प्रस्ताव दिया। कोनर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मुझे यकीन है कि उन्होंने अपनी गलती से सबक सीख लिया है और अब वह खुद को साबित करने के लिए दोगुनी मेहनत करेंगे। यह एक बेहतरीन मौका है एक ऐसे प्रतिभाशाली इंसान को मौका देने का जो खुद को साबित करना चाहता है।”

इस फैसले पर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं, लेकिन कई लोगों ने कोनर के फैसले की सराहना की कि उन्होंने गलती करने वाले को सुधरने का मौका दिया। कोनर का मानना है कि एक गलती किसी के पूरे करियर को खत्म नहीं कर सकती, खासकर जब कोई व्यक्ति सुधार करने के लिए तैयार हो।

HyperSpell एक उभरती हुई एआई कंपनी है जो भाषा प्रोसेसिंग और जनरेटिव एआई तकनीकों पर काम कर रही है। यह कंपनी अक्सर पारंपरिक भर्ती प्रक्रिया से हटकर प्रतिभा को अवसर देती है और कुछ अलग करने में विश्वास रखती है। कोनर का यह फैसला उनके स्टार्टअप की सोच को दर्शाता है—जहां नवाचार के साथ मानवता भी अहम है।

हालांकि सोहम पारेख ने अभी तक इस प्रस्ताव को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वे इस अवसर को गंभीरता से ले रहे हैं। अगर वे इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो यह उनके करियर को दोबारा पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

यह घटना टेक इंडस्ट्री में एक व्यापक बहस को जन्म देती है—क्या एक गलती के बाद सुधार की गुंजाइश होनी चाहिए? क्या आज के डिजिटल युग में पारदर्शिता और नैतिकता को नए नजरिए से देखने की जरूरत है?

कोनर ब्रेनन-बर्क का यह फैसला न सिर्फ साहसी है, बल्कि यह यह संदेश भी देता है कि यदि किसी में क्षमता और आत्ममंथन की शक्ति है, तो उसे एक और मौका मिलना चाहिए। यह देखना दिलचस्प होगा कि सोहम इस अवसर को कैसे भुनाते हैं और क्या वे खुद को एक नई पहचान दिला पाते हैं।

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